हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य के सरकारी खाते से नकली चेक के माध्यम से 20 लाख 64 हजार रुपये निकाले जाने के मामले से दो वर्ष बाद भी पर्दा नहीं उठ सका है। दो वर्षों में राजकीय मेडिकल कॉलेज मामले की आंतरिक जांच भी पूरी नहीं करा सका है। चिकित्सा-शिक्षा निदेशक और प्राचार्य दोनों ने ही मामले में गोलमोल जवाब देकर बचने का प्रयास किया।
परीक्षा कार्य के लिए पंजाब नेशनल बैंक की बरेली रोड शाखा में खाता खोला गया था। अक्तूबर 2015 में धीरे-धीरे कर बैंक खाते से लगभग 20 लाख 64 हजार रुपये नकली चेक के माध्यम से निकाल लिए गए थे। बैंक कर्मियों ने मेडिकल कॉलेज के एकाउंट विभाग में फोन कर 99 हजार रुपये निकालने के बारे में पूछताछ की थी। एकाउंट विभाग ने उक्त राशि का चेक किसी को भी नहीं दिया था। पूर्व प्राचार्य बैंक शाखा में गए थे और हैरान रह गए थे। 08 से 31 अक्तूबर तक फर्जी तरीके से अलग-अलग 19 चेक के माध्यम से खाते से कुल 20 लाख 63 हजार 999 रुपये निकाले गए थे। जांच में पता चला था कि 08, 09, 13, 17 और 29 अक्टूबर को एक-एक चेक से, 26 और 28 अक्टूबर को चार-चार चेक से, 31 अक्तूबर को छह चेकों से रकम निकाली गई। रकम मेरठ, दिल्ली और बिहार से निकाली गई थी। चेक नंबर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के पास सुरक्षित थे। ऐसे में सवाल ये था कि चेक नंबर धोखेबाजों तक कैसे पहुंच गए थे। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
सूत्रों की मानें तो दो वर्ष बाद भी राजकीय मेडिकल कालेज प्रबंधन अभी मामले की जांच नहीं करा सका है। दूसरी ओर बैंक ने राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से आंतरिक जांच कराकर रिपोर्ट देने को कहा था। हलफनामे में प्रबंधन को लिखकर देना था कि अगर जांच में मेडिकल कॉलेज का ही कोई व्यक्ति लिप्त मिलेगा तो धनराशि बैंक को वापस करनी होगी। लेकिन मेडिकल कालेज प्रबंधन की ओर से आज तक हलफनामा नहीं दिया गया है।
राजकीय मेडिकल कालेज प्रबंधन को आंतरिक जांच करानी थी। जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं दी गई है। रिपोर्ट देने के संबंध में लगभग 15-20 दिन पहले दोबारा पत्र भेजा गया है। प्रबंधन की ओर से भुगतान करने को कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही भुगतान के बारे में विचार किया जाएगा।
एके सचदेवा, सर्किल हेड, पंजाब नेशनल बैंक
जांच कमेटी क्या बनी थी, इस मामले में सिर्फ बैठकें होती रही हैं। मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पूरा मामला प्राचार्य के स्तर से हुआ था। पूरे मामले में बेहतर जानकारी प्राचार्य ही दे पाएंगे। शासन को भी मामले की जानकारी दी गई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज से भी इस प्रकरण पर पत्राचार चल रहा है। पूरे प्रकरण में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी है इसके बारे में जानकारी नहीं है। -डॉ. आशुतोष स्याना, चिकित्सा-शिक्षा, निदेशक
बचते रहे भैसोड़ा
राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने कहा कि वित्त नियंत्रक को इस मामले में निदेशालय स्तर पर बुलाया गया था और जांच की बात की थी। उन्होंने कहा कि अभी जांच नहीं हुई है और फिर बोले कि जांच को कमेटी बना दी थी। अभी जांच रिपोर्ट या बैठक के मिनट नहीं आए हैं। निदेशालय स्तर से कहा गया है कि दोबारा फिर जांच करो मगर अभी आदेश नहीं आया है। पीएनबी को नोटिस दिए गए हैं और भुगतान करने को कहा है। निदेशालय स्तर पर ही जांच की बात कहकर प्राचार्य बचते रहे।
लंबी तफ्तीश करने के बाद भी पर्याप्त साक्ष्य न मिल पाने के कारण प्रकरण में एफआर (फाइन रिपोर्ट) लगा दी गई है।
-बीसी मासीवाल, उपनिरीक्षक/तत्कालीन विवेचक