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दावत ने जिगर के टुकड़ों को जला दिया

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रामनगर। नयागांव पूछड़ी में रात के सन्नाटे मां के साथ बेटों के रोने चीखने की आवाज से गांव के लोग सन्न हो गए थे। इस हृदय विदारक घटना को देखकर हर किसी के आंखों में आंसू आ गए। लोगों का कहना था कि दावत में शामिल होने के गई मां झोपड़ी में सो रहे जिगर के टुकड़ों के लिए खाना पैक कर रही थी लेकिन उसे मालूम नहीं था कि झोपड़ी में आग लग गई हैं। अब खाने को खाने वाले उसके जिगर के टुकड़े मौत की नींद सो चुके हैं।
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मां झोपड़ी में सो रहे बच्चों का हाल जानने के लिए दावत के बीच लौटकर आई थी। उसने बेटी अंजलि और बेटे सूरज को कंबल ओढ़ाकर कहा था कि सो जाओ। अभी वह शादी से लौटकर आएगी, खाना लेकर आएगी। दोनों बच्चे बगैर खाए सो रहे थे। शादी समारोह में जाने के बाद मां का ध्यान झोपड़ी में ही लगा था कि बच्चे कैसे होंगे। इसी कारण वह बच्चों के लिए खाना पैक करने के बाद तत्काल समारोह से चल पड़ी थी। इस बीच झोपड़ी में आग लगने की सूचना मिल गई। मां पागलों की तरह खाना फेंककर झोपड़ी तक पहुंची, तब तक दोनों जिगर के टुकड़े आग की भेंट चढ़ चुके थे। मां सुनीता का कलेजा कैसे मानता, थर-थर कांप रही मां बच्चों को बचाने के लिए आग में कूदने जा रही थी लेकिन ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया। मां को नहीं मालूम था कि बच्चे अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन ग्रामीणों को पता था कि उसके कलेजे के टुकड़े सदा के लिए मौत की नींद में सो गए हैं। यहां आने के बाद मजदूर परिवार ने जो कमाया था वह आग की भेंट चढ़ गया। सुनीता के सिर से पति का साया पहले ही उठ चुका था। अब वह दो बच्चों के खोने पर छाती पीट पीटकर रो रही थी। कह रही थी कि दावत ने सब कुछ जला दिया। यदि वह दावत में नही जाती तो बच्चों का बचा लेती लेकिन उपर वाले को तो कुछ और ही मंजूर था।
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