हल्द्वानी। रामनगर की घटना से एक सप्ताह पहले गोरापड़ाव हरिपुर पूर्णानंद के खनन कारोबारी चंचल सिंह राठौर ने घर पर लाइसेंसी बंदूक से खुद को गोली से उड़ा दिया था। गोली से खुद को उड़ाने की घातक प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। गोरापड़ाव हरिपुर पूर्णानंद निवासी चंचल सिंह राठौर (50) पुत्र जोगा सिंह ने दो सितंबर को अपनी लाइसेंसी बंदूक निकाली और इसे लोड करने के बाद आंगन में तेज कदमों से चलते हुए खुद को गोली से उड़ा लिया। छोटे भाई शेखर सिंह राठौर ने बताया कि चंचल तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। कई दिनों से वह डरे-सहमे थे। वह अक्सर कहते रहते थे कि कोई उन्हें मारना चाहता था। कई बार तो वह सीढ़ियों के बीच छिप जाते थे। बड़े भाई के डिप्रेशन दूर करने के लिए इलाज और झाड़फूंक भी कराई। फिर भी सफलता नहीं मिल सकी। घटना के पहले उन्होंने ह्वाट्सएप पर मैसेज भी भेजा था। एक सप्ताह बाद रामनगर में दूसरी आत्महत्या से लोगों के कान खड़े हो गए हैं।
मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर, महिला कर चुके हैं आत्महत्या
हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) परिसर के ब्लॉक सी -6 में टाइप तीन फ्लैट की चौथी मंजिल से बुजुर्ग महिला के अचानक गिरने से 16 अगस्त 2017 को सनसनी मच गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। महिला मनी बहादुर बरेली के क्लैरा स्वैन मिशन अस्पताल से सेवानिवृत्त होने के बाद वहीं आवासीय कमरे में रहती थीं। सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में प्रयोगशाला सहायक सुरेश बहादुर इस फ्लैट में परिवार के साथ रहते हैं। उनकी पत्नी नीलिमा पीटर इसी अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं। 16 अगस्त 17 की सुबह नीलिमा ड्यूटी पर थीं। सुरेश भी अस्पताल जाने की तैयारी कर रहे थे। अचानक चीखने की आवाज सुनकर बाहर निकले तो भूतल पर अपनी मां मनी बहादुर (67) को लहूलुहान देखकर सन्न रह गए। उनका सिर फट गया था और पैर टूट गए थे। दस जनवरी 15 को जीएमसी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवीन गुप्ता ने भी डी टाइप-3 के चार नंबर फ्लैट की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या की थी। घटना के एक दिन पहले डॉक्टर की पत्नी रेनू गुप्ता अपने भाई के साथ गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद स्थित मायके चली गई थी। डॉक्टर ने तीन सुसाइड नोट लिखा था। सुसाइड नोट में डॉक्टर ने दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग, जामिया मिलिया की डीन डॉ. रागिनी, जीएमसी के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. आरसी पुरोहित सहित विभाग के अन्य डॉक्टरों के नाम लिखे थे। आरोप था कि अंडरवर्ल्ड से मिलकर कुछ लोगों ने उनकी पेन ड्राइव के साथ मेडिकल सर्टिफिकेट गायब कराए गए थे। अंत में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमा खारिज कर दिया।