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राज्य बनने के बाद 78 लोग घूस लेते पकड़े

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हल्द्वानी। राज्य बनने के पांच साल बाद से अब तक सतर्कता विभाग घूस लेते हुए 78 लोगों को रंगेहाथ पकड़ चुका है। इनमें सबसे अधिक गिरफ्तारी राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की हुई है। भ्रष्टाचार के आरोप में वन विभाग भी पीछे नहीं है।
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राज्य बनने के बाद सतर्कता विभाग ने 2005 से काम करना शुरू किया। हल्द्वानी स्थित सतर्कता विभाग की हल्द्वानी यूनिट ने 2005 में सिर्फ एक आरोपी को घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था। 2006 और 2007 में दो-दो लोग रंगेहाथ धरे गए। 2008 में पांच लोग और 2009 में 10 लोग अलग-अलग स्थानों से घूस लेते हुए पकड़े गए। 2010 में सबसे अधिक 14 लोगों को घूस लेने के आरोप में सतर्कता विभाग ने गिरफ्तार किया था। 2011 और 2012 में में चार-चार सरकारी कर्मचारी घूस लेते हुए पकड़े गए। 2013 में नौ लोग गिरफ्तार हुए, लेकिन 2014 में सबसे कम एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया। 2015 में सात कर्मचारी सतर्कता विभाग के हत्थे चढ़े। इसी प्रकार 2016 में नौ लोग गिरफ्तार किए गए। 2017 में तीन और 2018 में पांच लोग घूस लेते हुए पकड़े गए।
सतर्कता विभाग ने दो अप्रैल 2019 को रामनगर में एक वन दरोगा शैलेंद्र चौहान को एक लाख रुपये घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था। 19 अप्रैल को साल की दूसरी गिरफ्तारी काशीपुर में उत्तराखंड पावर कारपोरेशन के जेई राजेंद्र कुमार की हुई। जेई को सतर्कता विभाग ने 20 हजार घूस लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस बारे में पूछने पर पुलिस अधीक्षक अमित श्रीवास्तव ने बताया कि समीक्षा के दौरान पाया गया सतर्कता विभाग ने सबसे अधिक राजस्व विभाग से जुड़े तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी को घूस लेते हुए पकड़ा है। दूसरे स्थान पर वन विभाग, पावर कॉरपोरेशन है। विभाग ने शिक्षा और पुलिस विभाग के लोगों को भी घूस लेते हुए पकड़ा है।
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राज्य बनने के बाद 78 लोग घूस लेते पकड़े
घूस मांगने में राजस्व विभाग के अधिकारी, कर्मचारी सबसे ऊपर

वन विभाग के 34 लोगों पर चार्जशीट
सतर्कता विभाग के अनुसार गौला गेट पर फर्जी रवन्ना मामले में वन विभाग के 34 लोगों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजी गई है। अभी जांच में अन्य लोग आ सकते हैं। यह घोटाला 2002 से 2004 के बीच हुआ था, लेकिन मुकदमा 2009 में दर्ज हुआ था।
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