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रामनवमी के दिन बैराज में युवक डूबा, मौत

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डेमो पिक
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हल्द्वानी। काठगोदाम गौला बैराज में शनिवार की दोपहर स्नान करते समय एक युवक डूब गया। बचाने के लिए बैराज में उतरा उसका दोस्त भी गहरे पानी में चला गया। लोगों ने बमुश्किल उसे बाहर निकाला। युवक की मां ने बेटे की मौत के लिए उसके दोस्त को जिम्मेदार ठहराया है। काठगोदाम पुलिस मामले का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। रामनवमी के दिन घर का चिराग बुझने से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
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रामपुर रोड हरिपुर सुखा निवासी मनीष मेहरा (18) पुत्र भीम सिंह मेहरा शहर में एक ज्वैलर्स की दुकान मेें काम करता था। शनिवार को अवकाश होने के कारण वह अपने दोस्त कृष्णा कालोनी निवासी ऋषभ जायसवाल के साथ गौला बैराज में स्नान करने के लिए चला गया। ऋषभ के अनुसार दोनों बैराज के पास बैठे थे, इस बीच मनीष कपड़ा उतारकर स्नान करने के लिए बैराज में चला गया। गहरे पानी में मनीष डूबने लगा तो ऋषभ ने शोर मचाया और उसे बचाने के लिए बैराज में कूद गया। बकौल ऋषभ दोनों तैरना नहीं जानते थे, इस चक्कर में दोनों डूबने लगे। इस बीच वहां मौजूद लोगों ने ऋषभ को बचाकर बाहर निकाला। काठगोदाम थाने के उपनिरीक्षक कुंदन रौतेला पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से मनीष मेहरा को बाहर निकाला गया। पुलिस उसे नैनीताल रोड स्थित एक प्राइवेट अस्पताल ले गई जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस बीच मां कमला और छोटी बहन ज्योति भी अस्पताल पहुंच गईं। मां का आरोप था कि ऋषभ के चलते उसके बेटे की मौत हुई है। मनीष दो भाई और एक बहन से सबसे बड़ा था।


गौला बैराज में डूब गया युवक
दोस्त को लोगों ने बचाया, परिवार वालों ने दोस्त को ठहराया मौत का जिम्मेदार,
रामनवमी के दिन घर का चिराग बुझने से मचा कोहराम


मेरे जीवन का सहारा छिन लिया
बदहवास हो गईं मां ने कहा, किसी को छोड़ेगी नहीं
हल्द्वानी। जिगर के टुकड़े का शव देखकर मां कमला देवी अस्पताल में छाती पीटकर रोने लगी। चिल्लाते हुए कहने लगीं ‘मेेरे बेटे को जिंदा लाओ वर्ना अस्पताल से लाश नहीं उठने दूंगी। रामनवमी का त्योहार खराब कर दिया है।’
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जो भी कमला का हाल देख रहा था, उसकी आंखें नम थीं। कमला कह रही थीं कि लोगों के घरों में बर्तन मांजकर उसने बेटे को पाला था। अब वह घर गृहस्थी में मदद कर रहा था। कमला के अनुसार उनका बेटा ऋषभ के साथ रात में 11 बजे चल देता था। वह अब अपने पति को क्या जवाब देगी। मेरे जीने का सहारा था मनीष लेकिन ऋषभ ने सब कुछ छीन लिया। कमला के अनुसार उसका बेटा जिंदा नहीं रहा। अब किसी को वह नहीं छोड़ेगी, दरांती उठाने से भी परहेज नहीं करेगी। बेटी ज्योति रोते हुए बदहवास मां को चुप कराने में लगी थी। पुलिस ने भी मां-बेटी को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस शव लेकर मोर्चरी चली गई।

मैंने तो बचाने की कोशिश की थी
हल्द्वानी। मनीष की मां भले ही ऋषभ पर आरोप लगा रही हों मगर ऋषभ का कहना था कि उसने बचाने की कोशिश की थी लेकिन परिवार के सदस्य मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उसने बैराज में जाने के लिए मनीष को मना किया था क्योंकि उसे तैरना नहीं आता था। वह टुकटुक चलाकर अपना गुजारा करता है। वह भला ऐसा कदम क्यों उठाएगा।
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