हल्द्वानी। कुमाऊं में अन्य मुद्दों के साथ शराब भी राजनीति की दिशा बदल देती है। आबकारी विभाग ने अभी दो गोदामों को पकड़ा है लेकिन कई अन्य तस्कर गोदामों से अवैध धंधा कर रहे हैं। शराब के काले कारोबार से जुड़े लोगों के ऊपर राजनीतिज्ञों का हाथ है। यही कारण है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में डेनिम ब्रांड मुद्दा बना था तो भाजपा सरकार में दबंग ब्रांड ने राजनीति को काफी दिनों तक गर्माए रखा।
पुलिस और आम लोगों के बीच चर्चा है कि गोदाम के मालिक और उसमें करोड़ों की शराब रखने वालों की जानकारी सभी को है। कभी इस गोदाम के समीप एफएल-2 का गोदाम था। पुलिसकर्मियों का कहना है कि वे जानते थे कि अभी एफएल-2 का गोदाम चल रहा है। इसी कारण उन्होंने शराब की खेप पर हाथ नहीं डाला। चूंकि जांच की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है। इस कारण उसे पता था कि शराब का कौन सा गोदाम अवैध है। कुमाऊं में पंचायत या विधानसभा चुनावों में शराब की खपत ज्यादा होती है। यहां पीने वाले शौकीनों की संख्या काफी है। पिछली कांग्रेस सरकार में अंग्रेजी शराब का ब्रांड डेनिम चुनाव का मुद्दा बन गया था। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस ब्रांड को लेकर सवाल उठाए गए थे। वर्तमान भाजपा सरकार में देशी शराब का दबंग ब्रांड ने राजनीति को गरमाया है। प्रदेश स्तर पर शराब के अवैध धंधे से जुड़े तस्कर नियमों को राजनेताओं से बनवाते-बिगड़वाते रहते हैं। अब अवैध गोदाम का भंडाफोड़ होने के बाद तस्करों के करीबी राजनेता परेशान हो गए हैं। नेताओं को डर है कि तस्करों के पकड़े जाने पर उनकी पोल खुल सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कार्रवाई देहरादून के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर की गई है।