फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कार्बेट पार्क में पूर्व निदेशक समेत कई अफसरों की लापरवाही से बाघों का हुआ शिकार

विज्ञापन
कॉर्बेट नेशनल पार्क बारिश के दिनों में बंद कर दिया जाता है। - फोटो : अमरउजाला
विज्ञापन
हल्द्वानी। प्रमुख वन संरक्षक ने मार्च-2016 में बाघों की खाल बरामदगी के मामले में रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में बाघों के शिकार में मामले में कार्बेट पार्क के तत्कालीन निदेशक, कालागढ़ टाइगर रिजर्व और लैंसडौन के डीएफओ की प्रशासनिक शिथिलता को जिम्मेदार माना गया है। तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक/ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की प्रकरण में उत्तरदायित्व से बचने के प्रयास की निंदा की गई है।
विज्ञापन

मार्च-2016 में हरिद्वार में एसटीएफ ने पांच बाघों की खाल बरामद की। शुरुआत में कार्बेट पार्क प्रबंधन ने बाघों का कार्बेट पार्क का होने की पुष्टि की थी, पर कार्बेट पार्क क्षेत्र में शिकार होने की बात से इंकार किया था। इस मामले में कार्बेट पार्क के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठा था। प्रकरण में आपरेशन आई आफ द टाइगर इंडिया के राजीव मेहता ने शिकायत की थी। वनाधिकारियों पर सुबूतों को खुद-बुर्द करने तक का आरोप लगाया था। बाद में यह मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था।
इस मामले की जांच प्रमुख वन संरक्षक परियोजना व वर्तमान में प्रमुख वन संरक्षक जयराज को सौंपी गई। लंबे इंतजार के बाद प्रमुख वन संरक्षक ने रिपोर्ट जून के अंतिम सप्ताह में अपर मुख्य सचिव वन को सौंप दी थी। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि हाईकोर्ट में नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी ने माना है कि बाघों का शिकार कार्बेट पार्क में हुआ था। शिकार के मामले में तत्कालीन कार्बेट पार्क निदेशक समेत अन्य अधिकारियों की प्रशासनिक शिथिलता रही है, संबंधित अधिकारियों ने उत्तरदायित्व को सही ढंग से पालन नहीं किया है। इसके अलावा खाल बरामदगी के बाद वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया, देहरादून (डब्ल्यूआईआई ) से अगले साल कैमरा ट्रैप के माध्यम से अध्ययन कराने की अनुमति प्रमुख वन संरक्षक/ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक कार्यालय से नहीं दी गई। रिपोर्ट में तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक/ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को लेकर तल्ख टिप्पणी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले में संवेदनशील होने की जगह वह लगातार अपने उत्तरदायित्व से बचने का प्रयास करते रहे हैं। मामले में लिखित बयान न देने का भी उल्लेख किया गया है। इस संबंध में तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, कार्बेट पार्क के तत्कालीन निदेशक से पक्ष लेने का प्रयास किया गया, पर बात नहीं हो सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन


कार्बेट पार्क अफसरों की लापरवाही से बाघों का हुआ शिकार
प्रमुख वन संरक्षक ने शासन को सौंपी रिपोर्ट
तत्कालीन निदेशक, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की भूमिका पर भी उठाए सवाल
2016 में हरिद्वार में एसटीएफ ने पांच बाघ की खालें की थी बरामद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें