नैनीताल। सिर कटे, अधजले और सड़े गले शवों की भी शिनाख्त हो सकेगी। भविष्य में मिलने वाले शवों का पुलिस डीएनए टेस्ट करवाएगी और रिपोर्ट को सुरक्षित रखेगी, अगर किसी व्यक्ति से अज्ञात शव की कोई समानता होती है तो पुलिस उसके परिवार के अन्य लोगों के डीएनए से सच्चाई जान सकेगी। डीआईजी अजय जोशी ने इसके लिए अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
दूसरी जगह हत्या कर शव कुमाऊं की वादियों में फेंकने का क्रम जारी है। साल 2018 में मंडल में कुल 154 अज्ञात शव मिले। इनमें सबसे ज्यादा ऊधम सिंह नगर जिले में और सबसे कम अल्मोड़ा जिले में मिले हैं। मंडल में राज्य गठन के बाद से अब तक 300 से ज्यादा मौतें सिर्फ राज बनकर रह गईं हैं। इनमें से अधिकतर को हत्या कर यहां फेंका गया था। शातिर हत्यारे दूसरे जिले एवं प्रदेशों में हत्या कर शव यहां फेंक देते हैं। शव के पास ऐसा कोई सुराग नहीं छोड़ते हैं, जिससे उसकी शिनाख्त हो सके। कई शवों को जला दिया जाता है तो कुछ शवों का चेहरा खराब कर दिया जाता है। कई शव खाई और घने जंगल में फेंक दिए जाते हैं, जिससे वह सड़ी-गली हालत में कई दिन बाद मिलते हैं। कई शव सिर काट कर फेंक दिए जाते हैं। ऐसे में पुलिस के सामने इन शवों की शिनाख्त कराने की बड़ी चुनौती होती है। नतीजतन इनके कातिल खुलेआम घूमते रहते हैं। अब डीआईजी ने ऐसे जटिल केसों को सुलझाने के लिए अधिकारियों को डीएनए टेस्ट कराने के निर्देेश दिए हैं।
लावारिस शवों को मिलेंगे वारिस
गुमशुदा लोगों के परिजनों के डीएनए से कराया जाएगा मिलान
डीआईजी ने अधिकारियों को दिए डीएनए टेस्ट के निर्देश
एक साल के दौरान कुमाऊं में मिले 154 अज्ञात शवों में से सिर्फ 37 की हुई है शिनाख्त
पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अज्ञात शवों का डीएनए टेस्ट करवा लें, ताकि भविष्य में जरूरत पड़े तो डीएनए के जरिए शव की शिनाख्त हो सके। -अजय जोशी, डीआईजी।
जिला अज्ञात शव मिले शिनाख्त
ऊधम सिंह नगर जिले 68 13
अल्मोड़ा 2 0
नैनीताल 56 10
चंपावत 15 6
पिथौरागढ़ 13 8
बागेश्वर 0 0
154 37