हल्द्वानी। साईं अस्पताल में ऑपरेशन के बाद मरीज नरेंद्र सिंह रावत की मौत मामले में पुलिस किडनी डीएनए जांच के लिए लखनऊ भेजेगी। नरेंद्र सिंह रावत के शव का मंगलवार को पोस्टमार्टम कराया गया और जांच के लिए विसरा सुरक्षित रख लिया।
अल्मोड़ा जिले के रानीखेत पपना के मूल निवासी (हाल निवास देवलचौड़ बंदोबस्ती) दुकानदार नरेंद्र सिंह की पत्नी ने दो लोगों पर डॉक्टरों की मिलीभगत से किडनी निकलवाने का आरोप लगाकर सोमवार को अस्पताल में हंगामा किया था। पत्नी का आरोप है कि किडनी निकालने की साजिश में शामिल दो लोगों ने फर्जी भाई-बहन बनकर उसके पति को अस्पताल में भर्ती कराया था। यह भी आरोप था कि नरेंद्र को भर्ती करने वाली सतेश्वरी रावत की भूमिका संदिग्ध हैं। वह किसी गिरोह से जुड़ी है। जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि किडनी में संक्रमण फैलने के कारण एक किडनी निकाली गई थी।
थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत का कहना है कि परिजन किडनी को लेकर डॉक्टर और एक महिला पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस कारण किडनी डीएनए जांच के लिए लैब में भेजी जाएगी। रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाएगा कि किडनी मौजूद है और उसे किसी ने चुराया नहीं है। रिपोर्ट से संक्रमण भी स्पष्ट हो जाएगा।
किडनी की लखनऊ में होगी डीएनए जांच
डॉक्टर और एक महिला पर सवाल खड़े करने पर पुलिस ने लिया फैसला
नरेंद्र की मौत का मामला
पोस्टमार्टम रिपोर्ट
पोस्टमार्टम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा और डॉ. डी बनकोटी की टीम ने किया। चर्चा है कि मल्टी आर्गन फेल होने के कारण नरेंद्र की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
दीपा का बयान सही नहीं पाया गया
हल्द्वानी। थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत का कहना है कि पत्नी ने प्रार्थनापत्र में बताया है कि उसे मौत के बाद सूचना दी गई। जबकि पता चला कि डाक्टर ने किडनी निकालकर भर्ती कराने वाली महिला को सौंप दिया था। मुखानी पुलिस के अनुसार अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहा है कि दीपा अपने पति का हाल जानने के लिए रविवार की दोपहर अस्पताल में गई थी। उसने रजिस्टर पर दस्तखत भी किए। इस बीच उसने अस्पताल में नरेंद्र को भर्ती कराने वाली महिला सतेश्वरी से भी बातचीत की थी। अस्पताल प्रबंधन का बयान अभी तक सही पाया गया है।