हल्द्वानी। बेस अस्पताल में कथित रूप से रिश्वत लेकर मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने पर छात्र-छात्राओं ने हंगामा कर दिया। मामला बढ़ता देख छात्र-छात्राओं की राशि लौटाए गए। मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए छात्र-छात्राओं को घंटों भटकना पड़ा।
बेस अस्पताल में दो दिन से कई निजी विद्यालयों के कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने आए थे। छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि सोमवार को इमरजेंसी में बैठे एक डॉक्टर ने सरकारी पर्चे पर हस्ताक्षर कर मेडिकल के तीन-तीन सौ रुपये ले लिए। इस पर छात्र-छात्राओं ने हंगामा कर दिया। वह सीएमएस कार्यालय तक पहुंच गए। छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि मेडिकल प्रमाण पत्र के लिए जमा हुए 150 रुपये और ब्लड ग्रुप की जांच के लिए 30 रुपये की रसीद मिली है, जबकि मेडिकल प्रमाण पत्र के नाम पर 300 रुपये डॉक्टर ने लिए हैं। कई छात्र-छात्राओं का कहना था कि उनसे ली गई अतिरिक्त राशि नहीं लौटाई गई है। बेस अस्पताल में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल रहा। छात्र-छात्राओं का आरोप था कि हंगामे के बाद डॉक्टरों ने मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने बंद कर दिए और जवाब दिया कि मेडिकल बनाएं या मरीज देखें।
बेस अस्पताल में छात्र-छात्राओं ने किया हंगामा, सीबीएसई के लिए मेडिकल बनवाने आए थे
वापस कराए गए पैसे, बाद में बच्चों को बिना मेडिकल के लौटाया गया
मेरे संज्ञान में ऐसा मामला नहीं है। किसी भी डॉक्टर ने सरकारी फीस के अलावा मेडिकल प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर अतिरिक्त राशि नहीं ली गई है। डॉक्टर ने स्कूल के फॉरमेट की बजाए अस्पताल के ओपीडी के पर्चे पर मेडिकल बनाने की बात कही थी।
- डॉ. एसबी ओली, सीएमएस, बेस अस्पताल, हल्द्वानी।