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वन निगम का घपला

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भारतीय करंसी
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हल्द्वानी। जीएसटी के कामों के लिए चयनित उत्तर प्रदेश की सीए फर्म को फायदा पहुंचाने के कई और मामले भी अब सामने आ रहे हैं। अब यह भी सामने आया है कि उत्तर प्रदेश की इस सीए फर्म को कई तरह का ऐसा भुगतान भी किया जा रहा है जिसकी बचत की जा सकती थी।
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वन विकास निगम उत्तर प्रदेश की मैसर्स जीजे निगम एंड कंपनी लखनऊ के सीए पर मेहरबानी की एक और तस्वीर सामने आई है। एक सूचना के अधिकार में खुलासे से सामने आया है कि संस्था के सीए को लखनऊ स्थित घर से टैक्सी से निकलने से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचने तक, वहां से देहरादून तक हवाई यात्रा और वापस घर जाने के लिए रेल का एसी और वहां से टैक्सी से घर पहुंचने तक सभी खर्चे वन निगम ही वहन करता है। इस तरह सीए का देहरादून का एक दौरा 10-15 हजार रुपये के बीच होता है। अगर सीए ने हल्द्वानी वगैरह अन्य कहीं कार्यशाला का आयोजन किया तो यह 16 हजार रुपये के पार जाता है। अगर सीए एक माह में चार-पांच दौरा करता है तो 60-75 हजार रुपये का बेवजह खर्च होता है। अब सवाल यह है कि उत्तराखंड पहले से ही कर्ज में डूबा है, ऐसे में यूपी की फर्म को ठेका देने का क्या औचित्य हैं। अगर यही काम उत्तराखंड की संस्था को सौंपा होता तो बेवजह होने वाले खर्च बच सकते हैं।
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मैसर्स जीजे निगम एंड कंपनी का एक यात्रा के खर्च का ब्योरा
लखनऊ से देहरादून हवाई यात्रा खर्च 4542 रुपये
हल्द्वानी से लखनऊ एसी सेकेंड क्लास 915 रुपये
खाने, पीने पर व्यय 1566 रुपये
सीए के लखनऊ स्थित घर से एयरपोर्ट का भाड़ा 333 रुपये
जौलीग्रांट हवाई अड्डे से दून मुख्यालय का भाड़ा 800 रुपये
देहरादून से हल्द्वानी टैक्सी का भाड़ा 5500 रुपये
लखनऊ रेलवे स्टेशन से सीए के घर का भाड़ा 294 रुपये
कुल जीएसटी 2511 रुपये
एक यात्रा पर कुल व्यय हुआ 16,461 रुपये
नोट : यह विवरण 30-31 अगस्त की सिर्फ एक यात्रा का है।
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