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व्यवसायी की हत्या का खुला राज दो आरोपी गिरफ्तार

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हल्‍द्वानी में व्यापारी विकास अग्रवाल की हत्या के आरोपियों संग पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। व्यवसायी विकास अग्रवाल हत्याकांड से बुधवार को पर्दा उठ गया। विकास को बिजली की फिटिंग करने वाले ठेकेदार ने अपने साथी की मदद से मारा था। वजह थी एक लाख 19 हजार रुपये की देनदारी। बकाए की यह रकम न देनी पड़े इसलिए योजना बनाकर व्यवसायी को कमलुआगांजा के जंगल में बुलाया गया और जान ले ली गई। पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी के बाद हत्याकांड का खुलासा किया। दोनों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त सरिया, चापड़, मोबाइल स्कूटी, सहित अन्य सामान बरामद कर लिया गया है।
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एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि व्यवसायी विकास अग्रवाल से मलिक का बगीचा निवासी ठेकेदार तहसीम पुत्र मोहम्मद अली (मूल निवासी किच्छा बंडिया भट्टा) बिजली का सामान खरीदता था। सामान खरीदने के बाद अग्रिम तारीख का चेक व्यवसायी को देता था। इसके लिए तहसीम अपने चाची की चुराई गई चेकबुक का प्रयोग करता था। उसने एक लाख 19 हजार रुपये का अग्रिम चेक व्यवसायी विकास अग्रवाल को सौंपा था। विकास ने ठेकेदार तहसीम से कहा कि यदि पैसा समय से भुगतान नहीं किया तो वह चेक बैंक में लगा देगा। ठेकेदार जुआ खेलने के कारण आर्थिक रूप से बर्बाद हो गया था। ठेकेदार सोचने लगा कि यदि व्यवसायी ने चेक बैंक में लगाया तो भुगतान होगा नहीं लेकिन चेकबुक चुराने की उसकी चोरी पकड़ी जाएगी। उसे जेल जाने का डर सताने लगा। इसी बेइज्जती से बचने के लिए उसने व्यवसायी को मारने की योजना बनाई। उसने अपने दोस्त लाइन नंबर 20 में रहने वाले गुलफाम के साथ हत्या की योजना बनाई। गुलफाम काशीपुर के खन्ना मेडिकोज के सामने के मोहल्ले का रहने वाला है।
योजना के तहत उसने रविवार को गुलफाम को भरतपुर नंबर 2 स्थित झाड़ी में चापड़ और रॉड के साथ बैठा दिया। इसके बाद व्यवसायी को सात बजे फोन कर पैसा देने के लिए कठघरिया तिराहे पर बुलाया। व्यवसायी स्कूटी से पैसा लेने के लिए तिराहे पर आया। इस बीच तहसीम ने उसकी स्कूटी खड़ी करवा दी। कहा कि साइड पर जाने के लिए रास्ता खराब है। इस कारण बाइक से चलना ठीक होगा। व्यवसायी उसकी बाइक पर बैठ गया। सुनसान स्थान पर जाने के बाद जैसे ही व्यवसायी नीचे उतरा तो गुलफाम ने उसके सिर पर सरिया से वार कर दिया। व्यवसायी मूर्छित होकर गिरा तो चापड़ से हमला किया। गुत्थमगुत्था होने पर दोनों ने जूते के फीते से गला कसकर मार विकास को डाला। दोनों ने पैर से भी गला दबाया था। तलाशी के दौरान तहसीम के पास से विवो का मोबाइल, चाभी का गुच्छा और गुलफाम के पास से पेन और आईडी मिली। दोनों ने घटना के बारे में विस्तृत जानकारी सीओ दिनेश चंद्र ढौडियाल, थानाप्रभारी के आर पांडे और एसएसआई मनोहर सिंह दसौनी को जानकारी दी।
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बिजली की फिटिंग करने वाले ठेकेदार ने साथी की मदद से ली जान, दोनों गिरफ्तार
चाची की चेकबुक चुराने का मामला खुलने की डर से बनाई हत्या की योजना

हत्या के बाद दुकान से चेकबुक और कागज उठा ले गए
विकास मारने के बाद दोनों एक बार फिर घटनास्थल पर गए। वहां शव पड़ा होने के बाद व्यवसायी की दुकान पर गए। वहां से उन्होंने चेक, अन्य कागजात लिए और अपने घर चले गए। बुधवार को थानाध्यक्ष कमाल हसन और उपनिरीक्षक कैलाश नेगी को सूचना मिली कि हत्या में शामिल आरोपी उजालानगर से भागने की फिराक में हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने दोनों को धर दबोचा।

जूते में लगे खून से खुली पोल
कोतवाली थाना प्रभारी केआर पांडे ने बताया कि जब तहसीम तक पुलिस पहुंची तो वह इधर-उधर की बातें करने लगा। लेकिन उसके जूते पर खून के छींटे लगे थे। पुलिस ने सख्ती की तो वह टूट गया। उसने बताया कि जुआ खेलने के कारण वह बर्बाद हो गया था। उसका साथी गुलफाम पहले मेडिकल की दुकान पर काम करता था लेकिन नौकरी छूटने के कारण वह भी बेरोजगार हो गया था। तहसीम ने उसे पैसा देने का भरोसा दिया था। तहसीम इंटर और गुलफाम हाईस्कूल तक पढ़ा है। तहसीम ने बताया कि वह किच्छा से बनभूलपुरा में सात-आठ साल पहले आकर रहने लगा था। गुलफाम काशीपुर से सात महीने पहले यहां काम की तलाश में आया था। बेरोजगार होने के कारण तहसीम ने उसका फायदा उठाया।

16 नवंबर को ही मारने की थी योजना
हल्द्वानी। अभियुक्तों ने खुलासा किया कि वे 16 नवंबर को ही विकास को मारना चाहते थे लेकिन उस समय विकास ने काम अधिक होने के कारण आने में असमर्थता जताई थी। तहसीम ने घटना से पहले गुलफाम को विकास की दुकान दिखाई थी और मारने के लिए स्थान तलाशने को कहा था। गुलफाम ने भरतपुर नंबर 2 के जंगल को चुना। दोनों ने सुनसान स्थान पर शराब भी पी। सीओ दिनेश चंद्र ढौडियाल ने बताया कि पूछताछ के दौरान तहसीम ने काफी छकाया लेकिन पुलिस के पास ऐसे ठोस साक्ष्य थे। जिनका जवाब देने पर दोनों मजबूर थे। हत्या के दूसरे दिन भी तहसीम ने घटनास्थल पर जाने के लिए गुलफाम को फोन किया लेकिन गुलफाम ने डर के चलते वहां जाने से मना कर दिया। एसओजी प्रभारी दिनेश चंद्र पंत टीम ने घटना के बाद से ही दोनों के मोबाइल नंबर को ट्रेस को कर लिया था।


जुए की लत ने छीन लिया एक परिवार का सहारा
हल्द्वानी। बेहरमों के हाथों मारा गया निर्दोष व्यवसायी अपने परिवार का इकलौता सहारा था। बूढ़े माता-पिता बाप अपने छोटे बेटे में ही उम्मीद की किरण देखते थे लेकिन तहसीम की जुए की लत ने बूढ़े मां बाप के सपनों का कत्ल कर दिया। पत्नी ममता की कच्ची गृहस्थी भी कातिलों ने उजाड़कर रख दी।
तहसीम को व्यवसायी विकास भरोसेमंद समझकर अपना माल उधार देता था लेकिन कातिलों ने भरोसे का भी कत्ल कर दिया। इस घटना से अन्य व्यवसायियों का भी भरोसा टूट गया है। तहसीम ठेके से अच्छा पैसा कमाता था लेकिन बनभूलपुरा के युवकों की सोहबत में फंसने पर जुआ खेलने का आदि हो गया। जुएं के चलते उसका धंधा चौपट हो गया। इसी कारण वह व्यवसायी को समय से पैसा नहीं लौटा पाया। विकास से उसका चार साल से परिचय था। वह उसके परिवार से भी परिचित हो गया था लेकिन कत्ल करते समय उसके हाथ नहीं कांपे। व्यवसायी के मासूम बच्चों का भी ख्याल नहीं किया। व्यवसायी के बड़े भाई कोलकाता में नौकरी करते हैं। बूढ़े पिता मुनीकांत को आंखों से कम दिखाई देता है। मां साधना भी किसी प्रकार अपना दैनिक काम करती है। कातिलों ने व्यवसायी की हत्या कर बूढ़े माता पिता का सहारा छीन लिया। रोते हुए माता-पिता कातिलों को कोस रहे हैं। वे कह रहे हैं कि आखिर मेरे बेटे ने तहसीम का क्या बिगाड़ा था। पत्नी की रोते रोते तबियत खराब हो गई है।

डीआईजी की तरफ से मिलेगा पांच हजार इनाम
एसपी सिटी ने बताया कि घटना का जल्द खुलासा करने पर पुलिस टीम को एसएसपी जन्मेजय खंडूरी की तरफ से ढाई हजार और डीआईजी पूरन सिंह रावत की तरफ से पांच हजार रुपये का इनाम मिलेगा। घटना का खुलासा करने में थानाध्यक्ष कमाल हसन के साथ एसएसआई मनोहर सिंह दसौनी, बनभूलपुरा थानाध्यक्ष दिनेश नाथ महंत ने अहम भूमिका निभाई है।
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