नैनीताल। जालसाजों ने विधवा आश्रम को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दिया। पुलिस जांच में फर्जीवाड़ा खुला तो मल्लीताल पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मल्लीताल स्थित आवागढ़ कंपाउंड क्षेत्र में दशकों पहले एक विधवा आश्रम खोला गया था। यहां बेसहारा विधवाएं रहती थीं। इसके अलावा इससे लगे क्षेत्र में 9 आउट हाउस भी बनाए गए थे। 2 दिसंबर 2017 को आगरा डायसेस ट्रस्ट की ओर से एसएसपी जन्मेजय खंडूरी को बताया गया था कि विधवा आश्रम की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने प्रकरण में कार्रवाई के लिए मल्लीताल कोतवाली पुलिस से मांग की। मामले की जांच कर रहे एसएसआई बीसी मासीवाल ने बताया कि संपत्ति कुल 17500 वर्ग फीट में है। इसकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसमें नैनीताल समेत काशीपुर व आगरा के तीन पक्षों में विवाद चल रहा था। ट्रस्ट की करोड़ों की संपत्ति अनिल डेविड, टी जॉनसन व वीके रॉविन्सन ने मदन जोशी, मोहन जोशी, प्रदीप जोशी, नंदन अग्रवाल को 2014 में फर्जी तरह से बेच दी। जबकि वह जमीन बेचने के अधिकृत नहीं थे। उन्होंने बताया कि यह विधवा आश्रम खरीदने और बेचने का अधिकार किसी को नहीं है। आरोपियों को ट्रस्ट की ओर से 2012 में ही निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद 3 दिसंबर 2017 को तीनों पक्षों के खिलाफ 107,116 सीआरपीसी की कार्रवाई कर संयुक्त मजिस्ट्रेट के न्यायालय में रिपोर्ट पेश की गई। 5 दिसंबर को स्वामित्व के विवाद को रोकने के लिए धारा 145 की कार्रवाई की गई। साथ ही शासन तथा प्रशासन को मामले में एसआईटी की जांच किए जाने के लिए भी लिखा गया। एसआईटी की ओर से जांच आख्या आईजी कुमाऊं व एसएसपी नैनीताल को सौंपी गई। एसएसपी के आदेश पर विवेचक बीसी मासीवाल ने धोखाधड़ी, कूट रचना, आपराधिक षड्यंत्र करने आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसमें दो अज्ञात लोग भी शामिल हैं।