नैनीताल। दिल्ली निवासी तमन्ना की मौत के प्रकरण में जिला अस्पताल के डॉक्टरों की भारी लापरवाही उजागर हुई है। इतना संवेदनशील केस होने के बावजूद डॉक्टरों ने विसरा प्रिजर्व नहीं किया। जबकि विसरा रिपोर्ट केस के खुलासे में महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकती थी।
अपने पति सद्दाम के साथ नैनीताल घूमने आई दिल्ली के मंडोली गांव निवासी तमन्ना की 15 जनवरी को पहाड़ी से गिरने के कारण मौत हो गई थी। पति सद्दाम ने इसे हादसा बताया था जबकि तमन्ना के भाई आसिफ ने हत्या का केस सद्दाम के पूरे परिवार पर दर्ज कराया है। सीओ सिटी विजय थापा केस की विवेचना कर रहे हैं। अभी तक पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। तमन्ना की हत्या हुई या फिर हादसे में उसकी मौत हुई पुलिस अभी इस संबंध में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत सिर की दो हड्डियां टूटने से होना बताया गया है। अधिवक्ताओं और डॉक्टरों का कहना है कि केस बहुत ही संवेदनशील है। कई पहलू ऐसे हैं जो सद्दाम को शक के घेरे में लाकर खड़े करते हैं। डॉक्टर और अधिवक्ताओं का कहना है कि तमन्ना की मौत भले ही सिर की हड्डियां टूटने की वजह से हुई हो, लेकिन इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि पहले उसे नशीला पदार्थ खिलाया गया हो। नशीला पदार्थ खाने से तमन्ना खुद ही पहाड़ी से नीचे गिर गई हो। एमबीए की पढ़ाई कर चुकी तमन्ना इतनी नासमझ भी नहीं हो सकती कि पहाड़ी से गिर जाए। दूसरी ओर सद्दाम का उल्टी आने की बात कहकर उस पहाड़ी के ऊपर गाड़ी रुकवाना जहां से नीचे देखने पर ही डर लगता है, उसे शक के घेरे में खड़ा करता है। पति सद्दाम के खिलाफ हत्या का केस भी दर्ज हो चुका है। सबके मन में यह जानने की उत्सुकता है कि आखिरकार तमन्ना गिरी या गिरा दी गई। इसके बावजूद डॉक्टरों ने विसरा प्रिजर्व नहीं किया है। ऐसा जानबूझ कर किया गया या फिर डॉक्टरों से गलती हुई, यह तो पुलिस विवेचना में ही पता चलेगा। कहा जा रहा है कि इतने संवेदनशील केस में डाक्टरों ने विसरा प्रिजर्व करना क्यों उचित नहीं समझा।
क्यों जरूरी था विसरा प्रिजर्व करना
विसरा जांच होना इसलिए जरूरी था क्योंकि इसी से पता चलता है कि मृतक को मरने से पहले नशा या जहर तो नहीं दिया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि तमन्ना की हत्या का केस दर्ज है और वह पहाड़ी से गिर कर मरी है। ऐसे में आशंका इस बात की भी है कि उसे नशा दिया गया हो ताकि वह खुद ही पहाड़ी से नीचे गिर जाए।