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आमपोखरा रेंज मे हाथी दांत प्रकरण

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रामनगर के जंगल में कांबिंग - फोटो : अमर उजाला
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रामनगर (नैनीताल)। तराई पश्चिमी वन प्रभाग की आमपोखरा रेंज में करंट से हाथी मारकर दांत तस्करी का मुख्य आरोपी नहीं पकड़ा जा सका है। इससे हो रही विभाग की किरकिरी बचाने के लिए तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ ने सीबीसीआईडी जांच की संस्तुति की है। मामले की स्वतंत्र जांच के लिए दूसरे प्रभाग के एसडीओ को भी दूसरा जांच अधिकारी बनाया गया है।
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इस मामले के पुराने जांच अधिकारी एसडीओ कलम सिंह बिष्ट ने शुक्रवार को हल्द्वानी जेल जाकर रंगेहाथ पकड़े गए मो. कासिम से दोबारा बयान लिए। उसने बताया कि हाथी को मारने के बाद घटना स्थल पर ही हाथी की हड्डियों को जला दिया गया। रात को ही झाडू लगाकर राख को नाले में बहा दिया गया। दांत निकाल घर में ही रखे गए गए थे। इस काम में तीन-चार लोगों ने मदद की थी। तीन लोग पकड़े जा चुके हैं। वहीं डीएफओ डीके सिंह ने बताया कि सीबीसीआईडी से मामले की निष्पक्ष जांच के लिए भी उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। फिलहाल मुख्य आरोपी वन गुज्जर गुलाम रसूल उर्फ गामा की तलाश में शुक्रवार को भी जंगल में कांबिंग की गई। लोगों को बताया गया कि किसी भी अपराध की जानकारी विभागीय अफसरों को दे सकते हैं। उनके नाम गुप्त रखे जाएंगे। इनाम भी मिलेगा। पश्चिमी वृत्त के वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि हाथी दांत तस्करी की स्वतंत्र जांच के लिए हल्द्वानी जू के एसडीओ गोपाल सिंह कार्की को भी दूसरा जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। कार्की नए, पुराने मामलों क्या-क्या होता रहा है। इसके लिए कौन जिम्मेदार था आदि मामलों की जांच स्वतंत्र रूप से करेंगे जबकि पहले से जांच अधिकारी कलम सिंह बिष्ट केवल हाथी की मौत से संबंधित प्रकरणों की ही जांच करेंगे।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ ने संस्तुति की
मुख्य आरोपी की तलाश में जंगलों में कांबिंग
अभियुक्त के बयान लेने जांच टीम हल्द्वानी जेल पहुुंची
विभाग ने एक और स्वतंत्र जांच अधिकारी नियुक्त किया

कार्बेट में भी निगरानी बढ़ाई गई
रामनगर। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक सुरेंद्र मेहरा ने बताया कि आमपोखरा रेंज में हाथी दांत तस्करी के खुलासे के बाद कार्बेट नेशनल पार्क में भी निगरानी बढ़ाई गई है। सभी क्षेत्रों में मुखबिर तंत्र को और मजबूत कर दिया गया है। मेहरा ने बताया कि पार्क की दक्षिणी सीमा अतिसंवेदनशील है। इसलिए यूपी के क्षेत्रों में खुफिया तंत्र लगाया गया है लेकिन हमारा जंगल आमपोखरा रेंज के जंगल से सटा होने के कारण उक्त क्षेत्र में भी गश्त बढ़ाई गई है।
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