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हत्यारोपी मुजफ्फरनगर में अपने परिवार को किया था आतंकित

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हल्द्वानी। चाकू से गोदकर बुजुर्ग मामा की हत्या करने के बाद भांजे ने अपने बहनोई को फोन कर जान से मारने की धमकी थी। बहनोई उस समय हैड़ाखान गया था इसलिए उसकी जान बच गई।
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मुजफ्फरनगर के निवासी और इस समय लाइन नंबर 12 में रहने वाले मोहम्मद उस्मान का कहना है कि वह हत्यारोपी मनशाद के बहनोई हैं। अपने मामा की हत्या करने के बाद मनशाद ने उन्हें फोन किया था। उसने बताया था कि वह मामू (मामा) को ठिकाने लगा चुका है। अब तुम्हारी बारी है। इसके बाद वह लाइन नंबर 12 निवासी नजाकत के घर भी चाकू लेकर पहुंचा था। बच्चे चाकू हाथ में देखकर डर गए और कमरा बंद कर दिया था। उस्मान के अनुसार मनशाद नजाकत से ही कंबल लेकर बेचता था। घटना के पहले उसने एक रिक्शा चालक और छोले का ठेला लगाने वाले से झगड़ा किया था। ठेले वाले उसके मामू (शफीक) से शिकायत की थी। रिक्शा चालक ने उसे एक थप्पड़ जड़ भी दिया था।

मीट काटने वाले चाकू से ली थी जान
पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि मनशाद मीट काटने वाला चाकू लेकर मामा के घर गया था। जब उसने समय हमला किया तब वह वाइपर से कमरे की सफाई कर रहे थे। हमले के दौरान उसने पेट और सीने में सात वार किए थे।
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पूरा परिवार मनशाद से डरता है
हल्द्वानी। बहनोई मोहम्मद उस्मान का कहना है कि मनशाद की अपने भाइयों से भी नहीं बनती है। डेढ़ दशक पहले उसने अपनी भाभी पर बुरी नियत की तो छोटे भाई ने चाकू से हमला कर दिया था। मनशाद के पेट और गर्दन पर अभी भी निशान हैं। मनशाद ने अपने दूसरे भाई के दो बच्चों को भी मारा था। इससे परेशान होकर बड़े भाई ने घर छोड़ दिया और पीलीभीत में जाकर रहने लगा।

पप्पू बना पहेली, हत्यारोपी गया जेल
हल्द्वानी। बनभूलपुरा पुलिस ने हत्यारोपी भांजे को बृहस्पतिवार को नैनीताल की अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया लेकिन घटना के दौरान चर्चा में आया पप्पू पुलिस के लिए भी एक पहेली बनकर रह गया है। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त खून से सना चाकू बरामद किया। चूंकि आरोपी का हाथ भी चाकू के फल से चोटिल हो गया था। इसी कारण पुलिस ने उसकी मरहम पट्टी करवाई। आरोपी ने बताया कि उसने अकेले मामा को मारा था। घटना से पहले पप्पू मामा के कमरे में गया था। इधर, शफीक के छोटे बेटे वसीम का कहना है कि घटना के समय पप्पू भी था लेकिन पुलिस ने उसे नहीं पकड़ने का प्रयास किया। इस बारे में थानाध्यक्ष दिनेश नाथ महंत का कहना है कि वसीम ने अपने प्रार्थनापत्र में पप्पू का जिक्र नहीं किया था। इसी कारण उससे पूछताछ नहीं की गई।

ऐसे पकड़ में आया मनशाद
हल्द्वानी। लाइन नंबर 14 में अपने मामा शफीक की हत्या करने के बाद मनशाद भाग गया था। मामा के बेटे की शिकायत पर पुलिस के उसकी बहन को पूछताछ के लिए बैठा लिया था। इस बीच मनशाद ने अपनी बहन को फोन कर कहा कि वह उसके घर आया है। इसके बाद पुलिस वहां पहुंची और मनशाद को पकड़ लिया। तब तक वह खून से सने अपने कपड़े नहीं बदल सका था।
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