हल्द्वानी। बीडीसी सदस्य वीरेंद्र मनराल उर्फ बीरू एक साल से अपने दुश्मनों के निशाने पर थे। मौका मिला तो दुश्मनों ने बीरू का काम तमाम कर दिया। खनन पर वर्चस्व को लेकर शुरू हुई जंग के बाद वीरेंद्र की जान ली गई।
पुलिस का मानना है कि बीडीसी का नाम दो साल पहले हुए हेमंत फर्त्याल की हत्या के बाद प्रकाश में आया था। दोनों के बीच विवाद की वजह खनन के पैसे का विवाद बताया गया था। हेमंत हत्याकांड में बीरू के साथ सुपारी किलर के नाम से चर्चित देवेंद्र उर्फ बाऊ का नाम सुर्खियों में आया था। देवेंद्र उर्फ बाऊ और बीरू कभी जिगरी दोस्त हुआ करते थे। दोनों साथ-साथ घूमा करते थे लेकिन पैसे के विवाद को लेकर दोनों जानी दुश्मन बन गए। इसका खुलासा बाजपुर पुलिस ने सितंबर 2017 को बाऊ सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर किया था। उस समय बाऊ के साथ पंजाब के दो लोग आए थे। पुलिस के बीच चर्चा थी कि बाऊ बीरू को मारने के लिए पंजाब के शूटरों को बुलाया था लेकिन पुलिस ने इस वार को विफल कर दिया। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद बीरू अपनी सुरक्षा को चौकस नहीं हुआ। इसी का नतीजा था कि दुश्मनों ने बीरू को मौत के घाट उतार दिया। दो साल के अंदर खनन के पैसे के विवाद को लेकर दो लोगों की हत्या हो चुकी है। पुलिस का मानना है कि अभी विवाद दायरा घटा नहीं है। कभी भी यह विवाद तूल पकड़ सकता है।
राठी गैंग की स्टाइल में तड़तड़ाई गोलियां
हल्द्वानी। बेखौफ अपराधियों ने उसी स्टाइल में गोलियां तड़तड़ाई, जैसे रुड़की और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राठी गैंग करता है। अपराधी पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए भाग निकले। अदालत से चंद कदम दूरी पर हुई इस घटना से शांति पसंद वातावरण में जीवन बसर करने वाले रामनगर के लोग दहशत में हैं। अपराधियों ने बीरू को ठिकाने लगाने के लिए फुल प्रूफ योजना बनाई थी। उन्होंने मौका मिलते ही बीडीसी सदस्य को लक्ष्य कर पेशेवर शूटर की तरह ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। गोलियों की आवाज सुनकर पुलिस मौके पर पहुंची तब तक अपराधी काफी दूर जंगल की तरफ भाग चुके थे। पुलिस ने जंगल में कांबिंग की लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। घटना के घंटों बाद पुलिस अधिकारी यह तहकीकात नहीं कर सके कि अपराधी किस रास्ते से आए थे। पुलिस का मानना है कि कार में सवार अपराधियों की संख्या तीन थी। कहा जा रहा है कि पूनम हत्याकांड के चलते रामनगर क्षेत्र की फोर्स दूसरी तरफ भेजी गई थी। इसी कारण शूटरों की घेराबंदी नहीं हो सकी।
कभी जिगरी दोस्त थे अब बन गए थे जानी दुश्मन