हल्द्वानी। राजकीय महिला अस्पताल परिसर में खड़ी स्कॉर्पियो में बृहस्पतिवार शाम छह बजे आग लग गई। आग की लपटें देख वहां अफरातफरी मच गई। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। घबराए तीमारदार इधर-उधर भागने लगे। दूसरा गेट नहीं खुलने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई। जब तक फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची कार जल चुकी थी।
गार्ड कमल वर्मा ने बताया कि एक तीमारदार अपनी स्कॉर्पियो (यूके 07 एफ 3500) नई बिल्डिंग के पास खड़ी करने के बाद दवा लेने के लिए गया था। करीब 25 मिनट बाद उसमें अचानक आग लग गई। आग से परिसर में धुआं फैल गया। वहां मौजूद मरीजों के तीमारदार इधर-उधर भागने लगे। मंगलपड़ाव चौकी प्रभारी हरेंद्र सिंह नेगी और लीडिंग फायरमैन अर्जुन सिंह के नेतृत्व में फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, तब तक स्कॉर्पियो जलकर नष्ट हो गई थी। पुलिस ने स्कॉर्पियो चालक की काफी देर तक खोजबीन की लेकिन उसका पता नहीं चल सका। पुलिस द्वारा गूगल पर सर्च करने के बाद पता चला कि गाड़ी देहरादून आरटीओ से प्रोफेसर एसएस देव हेड डिपार्टमेंट आफ इंजीनियरिंग के नाम से अंकित है।
महिला अस्पताल में शोला बन गई स्कॉर्पियो
परिसर में खड़ी थी, शाम छह बजे लगी आग, दूसरा गेट नहीं खुलने से परिसर में मची भगदड़
सीसीटीवी दिखाने को कोई तैयार नहीं हुआ
हल्द्वानी। अस्पताल के सीसीटीवी का एक कैमरा घटनास्थल की तरफ केंद्रित है। कर्मचारियों ने बताया कि सीसीटीवी में पूरा दृश्य फुटेज से मिल सकता है लेकिन देर तक कोई कर्मचारी सीसीटीवी का कार्यालय खोलने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसी कारण पुलिस भी आग के कारणों का पता नहीं लगा सकी।
अस्पताल का अग्निशमन सिस्टम फेल
हल्द्वानी। महिला अस्पताल में आग बुझाने के लिए अग्निशमन सिस्टम लगा है लेकिन आग लगने पर कोई कर्मचारी आग बुझाने के लिए नहीं आया। पता चला है कि अग्निशमन का सिस्टम काम नहीं करता है। कर्मचारी भी अग्निशमन विभाग की गाड़ी के आने का इंतजार करते रहे।
बड़ा सवाल
कौन था स्कॉर्पियो का ड्राइवर, दवा लेकर वापस क्यों नहीं आया
हल्द्वानी। अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्थल पर सरेशाम स्कॉर्पियो जल जाती है लेकिन कारणों का पता नहीं चल पता। यह पता करने की भी जरूरत नहीं समझी जाती कि कार का ड्राइवर कौन था। 25 मिनट पहले वह दवा लेने गया था, फिर वापस क्यों नहीं आया। दवा लेने गया भी था दुकानें तो सड़क के उस पार थी। क्या उसे घटना नहीं दिखी। फिर वह लौटकर क्यों नहीं आया। गार्ड किस आधार पर कह रहा है कि वह दवा लेने गया था।
गार्ड नहीं करते हैं वाहनों की एंट्री
खुशियों की सवारी और एक कार चपेट में आने से बची
हल्द्वानी। महिला अस्पताल मेें बाहर से आने-जाने वाले वाहनों की एंट्री तक नहीं होती है। ऐसे में अस्पताल की पार्किंग में कोई भी व्यक्ति गाड़ी पार्क करके बेधड़क जा सकता है और कभी कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
स्कॉर्पियो के पास ही एक डॉक्टर की कार खड़ी थी। वहां मौजूद 108 एंबुलेंस के पूर्व कर्मचारी ने उस कार को हटाया जबकि धू-धूकर जल रही स्कॉर्पियो से कुछ ही दूरी पर खुशियों की सवारी भी खड़ी हुई थी। इस घटना के बाद अस्पताल में मौजूद गार्डों की लापरवाही भी सामने आई है। गार्डों ने आग लगने के बाद भी पूर्व में संचालित होने वाले महिला अस्पताल के गेट को खोलना भी मुनासिब नहीं समझा जबकि अस्पताल में आने-जाने वाले निजी वाहनों की एंट्री तक नहीं की जाती है।
गार्डों को निजी वाहनों की एंट्री के लिए रजिस्टर दिया गया है। गार्ड अगर वाहनों के नंबर की एंट्री नहीं कर रहे तो यह गंभीर मामला है। सीसीटीवी में पूरी घटना कैद है। शुक्रवार सुबह घटना की फुटेज देखी जाएगी। इमरजेंसी में पूर्व में संचालित गेट क्यों नहीं खोला गया इस पर कर्मियों से जवाब-तलब किया जाएगा।
-डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमएस महिला अस्पताल
सुशीला तिवारी अस्पताल में रैंप तक नहीं
हल्द्वानी। सात सौ बेड के बहुमंजिला सुशीला तिवारी अस्पताल में तीन फ्लोर के बाद रैंप की सुविधा नहीं है, जबकि अस्पतालों के मानकों के हिसाब से रैंप होना चाहिए। रोगियों और परिजनों के आने के लिए लिफ्ट और सीढ़ी का विकल्प है। इसमें भी लिफ्ट की सीमित भार क्षमता है। ऐसे में अगर कोई घटना होती है, तो रोगियों को बाहर निकालना भी एक चुनौती होगी। इसके अलावा अस्पताल के मुख्य भवन के आसपास भी बड़ी संख्या में वाहनों की पार्किंग होती है।
यह हो सकते हैं आग लगने के कारण
- गाड़ी अगर बंद खड़ी है तो ऐसे में बैटरी से अर्थिंग होने पर आग लग सकती है
- बीड़ी या सिगरेट पीकर अगर स्कार्पियो पर फेंकी है तो इंजन के आसपास या नीचे जाकर गिरी तो भी आग लग सकती है
- गर्मी अधिक होने के कारण एक चिंगारी भी आग पकड़ लेती है। गाड़ी चलकर आने के बाद गर्म होती है और ऐसे में आग लगने की आशंका होती है।