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कार्बेट पार्क प्रबंधन कई हेक्टेयर अपनी जमीन गया ‘भूल’

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हल्द्वानी। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) प्रबंधन अपनी जमीन 27 साल से ‘भूला’ बैठा है। कब्जे और सिरदर्दी से बचने के लिए 318 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर कोई ध्यान नहीं दिया क्योंकि एनएच के पास इस जमीन बेशकीमती जमीन पर कब्जा बढ़ता जा रहा है। अब रामनगर वन प्रभाग डीएफओ ने सीटीआर के निदेशक को पत्र लिखकर संबंधित जमीन पर नियंत्रण लेने को कहा है।
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तत्कालीन उत्तर प्रदेश में 1991 में तराई पश्चिमी वन प्रभाग और रामनगर वन प्रभाग का हिस्सा सीटीआर के बफर जोन के रूप में शामिल किया गया था। इसमें रामनगर वन प्रभाग की धुलवा बीट और दोमुंडा पूर्वी बीट का 318 हेक्टेयर वनक्षेत्र भी शामिल था। सूत्रों के अनुसार संबंधित जमीन पर 70 के दशक से कब्जा था। इसलिए सीटीआर प्रबंधन ने उस भूभाग पर नियंत्रण लेने में रुचि नहीं दिखाई। इस कारण मामला टलता रहा। वर्ष 2010 में सीटीआर के कोर और बफर जोन संबंधी नई अधिसूचना जारी हुई थी, उसमें में भी संबंधित भूमि का जिक्र था। तब भी सीटीआर प्रबंधन ने इस भूमि पर कब्जा लेने में रुचि नहीं दिखाई। अब रामनगर वन प्रभाग की डीएफओ नेहा वर्मा ने सीटीआर के निदेशक को पत्र लिखकर संबंधित वन भूमि पर नियंत्रण लेने को कहा है। मामले से जुड़े अभिलेखों को भी साथ में भेजा गया है। इससे सीटीआर प्रबंधन से लेेकर देहरादून तक खलबली मची है।
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रामनगर डीएफओ ने निदेशक को पत्र लिखकर 318 हेक्टेयर जमीन पर नियंत्रण लेने को कहा
27 साल बाद फिर उठा मामला
वन भूमि पर धीरे-धीरे हो गया भारी कब्जा

यह प्रकरण संज्ञान में आया है। कल ही संबंधित अधिकारियों से इस मामले में कार्रवाई करने को कहा जाएगा।
- जयराज, प्रमुख वन संरक्षक।
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