गड्ढा खोदकर खनिज निकालने की अनुमति नहीं है। ऐसे में एक क्रशर में विशालकाय गड्ढा खोदा गया था? वह नया है या पुराना बड़ा सवाल बन गया है। खान विभाग इस मामले का परीक्षण कराने की बात कह रहा है।
खान विभाग के अनुसार कुछ साल पहले एक निश्चित एरिया में गड्ढा खोदकर खनिज निकालने की अनुमति दी गई थी। इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए गए थे। करीब तीन साल से गड्ढा खोदकर खनिज निकालना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
ऐसे में गोरा पड़ाव क्षेत्र में बना विशालकाय गड्ढा सवालों के घेरे में है। यह गड्ढा नया बना है या पुराना है? इसको लेकर सवाल उठा है। उप निदेशक खनन राजपाल लेघा का कहना है कि गोरा पड़ाव के एक क्रशर को तीन गड्ढे खोदकर खनिज निकालने की अनुमति प्रदान की गई थी।
इसका परीक्षण कराया जाएगा कि जो विशालकाय गड्ढा है, वह उसी वक्त का है जब अनुमति दी गई थी या नया है। इसके अलावा अगर आबादी क्षेत्र में विशालकाय गड्ढा है, तो उसके भी चारों तरफ सुरक्षा के लिए बाउंड्री आदि के भी नियम बनाए गए हैं।
स्टाकिस्ट की व्यवस्था की गई बंद
पहले कुछ लोगों को छोटे स्तर पर खनिजों को स्टाक करने की अनुमति दी गई थी। बड़ी संख्या में लोग स्टाकिस्टों से भी रेता आदि खरीद लेते थे। कई बार स्टाकिस्टों से रेट को लेकर भी मोलभाव हो जाता था। बाद में शासन ने स्टाकिस्टों की व्यवस्था बंद कर दी।
इसके बाद से स्टोन क्रशर से ही माल खरीदने एक ही विकल्प रह गया। स्टाकिस्ट की व्यवस्था को बंद करने में एक खास लॉबी द्वारा शासन पर दबाव बनाने की चर्चा कही जाती रही थी।
रायल्टी रेट से लेकर खनन नियमावली कई बार बदली
शासन पर किस तरह रेता, बजरी का काम करने वालों का दबाव होता है, उसे पिछले साल खनिज रायल्टी के रेट से लेकर खनन नियमावली में किए गए बदलाव से समझा जा सकता है। खनन नियमावली से लेकर खनिज रायल्टी के रेट में बदलाव किया गया।
खनन नियमावली ही साल में करीब छह बार बदली गई। इसी तरह रायल्टी के रेट को लेकर उठा पठक चलती रही। कई बार रायल्टी के रेट बदल गए। आखिरकार वन विभाग के सीमांकन आदि के लिए जो मद होता है, उसे तक खत्म कर दिया गया। इसके पीछे भी एक लाबी सक्रिय थी, जिसकी खूब चर्चा थी।
इसके अलावा ज्यादा खनिज निकल सके? इसके लिए तौल के नियमों में भी बदलाव किया गया। पहले एक घनमीटर में 18 कुंतल खनिज निकलता था, बाद में उसे 22 कुंतल किया गया। फिर बदल कर 18 किया गया और आखिरी में फिर बदलाव कर दिया गया।