अमृत योजना से पहले दुरुस्त थी पेयजल योजना, अब नहीं मिलता पर्याप्त पानी
चार साल से क्षेत्र की पांच हजार की आबादी पानी की समस्या से जूझ रही है। समस्या अमृत योजना के बाद ज्यादा गंभीर हो गई है। जो पानी पहले घंटे-डेढ़ घंटे तक आता था, अब 25 से 30 मिनट ही आ रहा है। महिला डिग्री काॅलेज के पास ट्यूबवेल की क्षमता एक हजार परिवार की है लेकिन यहां दो हजार से अधिक लोगों को कनेक्शन बांट दिए गए हैं। अधिकारी खुद इस बात को स्वीकार करते हैं लेकिन समाधान नहीं खोजते। जलभराव की बात करें तो बरसाती नाले के कारण बारिश के शुरुआती दौर में ही यहां जलभराव हो जाता है। वर्ष 2023 में नाले के लिए सर्वे भी हुआ था जो कागजों तक सीमित रह गया। वॉक-वे मॉल के पास देखखड़ी नाले को डायवर्ट कर सिंचाई की गूल में डाल दिया गया है। ओवर फ्लो होने पर यहां भी काॅलोनी में पानी भर जाता है क्योंकि निकास का मार्ग नहीं है। तीसरी बड़ी समस्या एचपीसीएल ने गैस पाइपलाइन डालने के नाम पर तीन साल पहले सड़क खोद दी लेकिन कनेक्शन नहीं मिला।
राजेंद्र सिंह जीना, निवर्तमान पार्षद, वार्ड नौ।
बरसाती नालों से बचाव की समस्या का नहीं हुआ समाधान
बरसात हो रहे जलभराव से सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है। बारिश के दौरान नवाबी रोड से कैनाल काॅलोनी होते हुए रामपुर रोड की सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। बरसात से पहले इंतजाम पूरे क्यों नहीं किए जाते हैं। जब से स्ट्रीट लाइटों का काम ठेके पर दे दिया गया है, पूरे क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। दो-चार माह से शिकायतों का अंबार लगा है जिनका समाधान ही नहीं हो पा रहा है। हम पार्षद जनता को कैसे मुंह दिखाएं। नगर निगम की अलग बदनामी हो रही है। इसके अलावा शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में पेयजल भी शामिल है। क्षेत्र के लोगों पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। बोरिंग हैं नहीं, टैंकरों से भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। करीब आठ हजार की आबादी को हर रोज परेशानी झेलनी पड़ रही है। एसबीआई के पास पुलिया क्षतिग्रस्त है, शिकायत भी की गई लेकिन अभी तक ठीक नहीं हुई।
-मनोज गुप्ता, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 18
पार्षद मजबूर हैं, अधिकारी और एजेंसी सुनती नहीं
क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की समस्या का समाधान बड़ी चुनौती बना हुआ है। रात को सड़कों और गलियों में प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। लूट, जंगली जानवरों और जहरीले कीड़ों का खतरा बना हुआ है। हम पार्षद मजबूर हैं और एजेंसी है कि सुनती ही नहीं। आखिर नगर निगम व्यवस्था को ठीक क्यों नहीं कर रहा है। इसके अलावा हल्द्वानी की सबसे बड़ी समस्या पेयजल है। शहर की 60 प्रतिशत आबादी गौला नदी पर और 40 प्रतिशत नलकूप पर निर्भर है। आबादी तो बढ़ती गई लेकिन भंडारण क्षमता उस अनुरूप नहीं बढ़ी। नए ट्रीटमेंट प्लांट लगने चाहिए थे जो समय की जरूरत हैं। जनता ट्यूबवेल पर निर्भर है जो कि मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। वार्ड 18-19 से टेंपो स्टैंड भी हटना चाहिए।
-राजेंद्र कुमार, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 19
स्ट्रीट लाइट न होने से लोग शाम को पार्क की जगह घरों में रहना पसंद कर रहे
मेरे क्षेत्र में फॉरेस्ट एरिया काफी आता है और 250 से 300 परिवार यहां रहते हैं। स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था न होने से बारिश के समय लोगों के घरों में सांप और बिच्छू घुसने का डर बना रहता है। हालांकि मैंने मानसून से पहले क्षेत्र में व्यापक रूप से नालियों की सफाई कराई है जिससे इस बार कम ही घरों में पानी घुस रहा है। स्ट्रीट लाइट को लेकर पिछले वर्ष 24 अगस्त को बोर्ड बैठक में सभी पार्षदों ने स्टेट हेड के सामने शिकायत की थी लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हो पाई है। वार्ड में तीन पार्क भी हैं जहां लोग शाम को घूमने और बैठने पहुंचते थे लेकिन स्ट्रीट लाइट न होने से लोग अब घरों में रहना पसंद करते हैं। इसके अलावा क्षेत्र में पुरानी पेयजल योजना होने से लाइनें खराब हो रही हैं।
-मधुकर श्रोतिय, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 17
60 वार्डों में जलभराव, पानी, स्ट्रीट लाइट मुख्य समस्या
शहर के सभी 60 वार्डों में जलभराव, पानी और स्ट्रीट लाइट मुख्य समस्या बनी हुई है। आर्मी कैंटीन के पास बने कूड़ाघर की शिकायत करने के बाद भी उसे हटाया नहीं जा रहा है। जब कोई बड़ा जनप्रतिनिधि या मंत्री इस मार्ग से गुजरता है तो टेंट लगाकर कूड़े को ढक दिया जाता है ताकि मंत्री की नजर न जा सके। दूसरी समस्या आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या है। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। आवारा पशुओं के लिए जगह देने को लेकर पिछले साल पार्षदों ने निगम में धरना भी दिया था। अब रिहायशी इलाके में अस्थायी गोशाला बनाकर इतिश्री कर दी गई है। यहां जलभराव होने से लोग बीमार हो रहे हैं। गोशाला को रिहायशी इलाके से दूर बनाया जाना चाहिए।
-राधा आर्य, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 12
महिला डिग्री काॅलेज से मुखानी नहर, कुलियालपुरा तक पूरे क्षेत्र में सीवर की गंभीर समस्या है। यहां सीवर लाइन नहीं है। तीन से चार फीट चौड़ी गलियों में टैंक बुलाने पर दिक्कत खड़ी हो जाती है। सीवर लाइन बिछ जाएगी तो समस्या ही हल हो जाएगी। इसके अलावा वार्ड में नुमाइश लगने से जाम, ध्वनि प्रदूषण और अस्पताल आने वाले मरीज परेशान रहते हैं। पहले भी डीएम को ज्ञापन देकर नुमाइश शहर के बाहर करने की मांग कर चुके हैं। क्षेत्र में मेन रोड की नलियां आज तक ठीक नहीं हुई हैं। इसके अलावा बिजली, पानी की समस्या भी यहां की आबादी को झेलनी पड़ रही है।
-रवि वाल्मिकी, निवर्तमान पार्षद, वार्ड आठ