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Nainital News: निगम ने की देरी, मच्छर ने मुसीबत बढ़ा दी

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जल संस्थान के बाहर लगे कूलर में भरा पानी।  स्रोत स्वयं
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हल्द्वानी। नगर निगम ने इस बार लार्वी साइडल और फॉगिंग शुरू करने में एक महीना देरी कर दी। इससे क्षेत्र में डेंगू के मच्छर को पनपने का मौका मिल गया। जब तक निगम ने लार्वी साइडल और फॉगिंग शुरू कराई, तब बारिश होने लगी। इससे मच्छरों की पैदावार बढ़ गई। यही वजह है कि सितंबर-अक्तूबर में सामने आने वाले डेंगू के मामले जुलाई में ही आने लगे। शहर में अब तक डेंगू के छह केस आ चुके हैं। नगर निगम ने अभी भी सख्ती नहीं बरती तो डेंगू के मामले बढ़ सकते हैं।
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नगर निगम बारिश शुरू होते ही जून से ही लार्वी साइडल, फॉगिंग और पानी एकत्र होने वाले गड्ढों में डीजल आदि डालने का काम करता है। इस बार निगम ने इसे जुलाई में शुरू किया। जैसे ही निगम ने फागिंग-लार्वी साइडल डालने का अभियान चलाया तो बारिश की शुरुआत हो गई जिससे दवा बह गई। इस बीच कई दिन तक छिड़काव नहीं हो पाया। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बारिश देरी से शुरू होने के कारण इस बार फॉगिंग, लार्वी साइडल डालने में भी देरी हुई।

कोतवाली में भी मिला डेंगू का लार्वा
हल्द्वानी। सरकारी विभागों की लापरवाही और जानकारी के अभाव के कारण इन कार्यालयों में पड़े ऐसे बर्तन, टायर और साफ पानी रुकने के स्थानों में डेंगू का लार्वा पनप रहा है। पांच दिन पूर्व जिला मलेरिया अधिकारी डाॅ. मनोज कांडपाल ने कोतवाली के अंदर खड़ी पिकप में जमा हुए साफ पानी की जांच की तो उसमें मच्छर का लार्वा मिला इसे बाद में हटाया गया। निगम क्षेत्र में छह जगह अभी तक डेंगू का लार्वा मिल चुका है।
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लोगों की लापरवाही पड़ न जाए भारी
हल्द्वानी। नगर निगम क्षेत्र में खुले में टायर पड़े हुए हैं। इनमें पानी भरा है। उधर सरकारी कार्यालयों की छत पर टंकियां और उसके ढक्कन पड़े हुए हैं। इसमें भी मच्छर के लार्वा पनप रहे हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने इसकी पड़ताल की। अधिकतकर कार्यालयों में कूलर खुले हुए मिले। इसमें मच्छरों के लार्वा दिखाई दिए। बाजार क्षेत्रों में छत के ऊपर, दुकानों के बाहर पुराने टायर रखे थे। इसमें भी पानी भरा था। पुलिस की ओर से सीज किए गए वाहनों में भ पानी भरा था।

ये थे हाल -
- सुशीला तिवारी अस्पताल के भूतल मे बारिश का पानी जमा था। यहां मच्छर का लार्वा मिला।
- जल संस्थान के ऑफिस के बाहर कूलर खुला हुआ था। इसमें पानी भरा था। पानी में मच्छर बैठे थे।
- जल निगम कि छत पर एक गड्ढा था। उसमें भी पानी भरा हुआ था।
- तहसील कार्यालय मे रखी कूड़ा ट्रॉली और घड़े मे बारिश का पानी जमा था जिसमें मच्छर के लार्वा पनप रहे थे।
- जल निगम के ऑफिस की छत पर पानी की टंकी का ढक्कन गिरा हुआ था। इसमें पानी भरा था।



डेंगू से बचाव के लिए बरतें एहतियात
हल्द्वानी। घर में रखी पानी की टंकी, बाल्टी, कूलर और टब आदि को सप्ताह में एक दिन साफ कर जरूर सुखाएं। गमलों में रोज पानी दें, जिससे उनमें मौजूद मच्छरों का लार्वा नष्ट हो जाए। शरीर को पूरा ढकने वाले कपड़े पहनें। रेफ्रिजरेटर की ट्रे में पानी इकट्ठा न होने दें। मच्छरदानी का प्रयोग करें।

कैसा होता है डेंगू का मच्छर?
हल्द्वानी। चीते जैसी धारियों वाली मादा एडीज इजिप्टी के काटने से शरीर में डेंगू फैलता है। यह मच्छर अक्सर सुबह और दिन के समय ही काटते हैं। जिला मलेरिया अधिकारी डाॅ. मनोज कांडपाल ने बताया कि एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते, इंसान के घुटने के नीचे तक ही पहुंच पाते हैं। इसलिए शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े ही पहनें ताकि मच्छर से बच सकें। सुबह के वक्त भी पांव और हाथों को ढककर रखें। डेंगू के मच्छर गंदी नालियों में नहीं, बल्कि साफ-सुथरे पानी में पनपते हैं, साफ-सुथरे शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है।

कितने दिन में सामने आते हैं लक्षण
जिला मलेरिया अधिकारी डाॅ. मनोज कांडपाल ने बताया कि डेंगू के मच्छर के काटते ही आपको लक्षण महसूस होने नहीं लगेंगे। इसका प्रभाव तीन से पांच दिनों बाद होना शुरू होता है।

कोट-
नगर निगम क्षेत्र में छह जगह अभी तक डेंगू के लार्वा मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीम लगातार इस पर काम कर रही है। टीमें लगातार लोगों को जागरूक भी कर रही है।
डॉ. मनोज कांडपाल, नगर स्वास्थ्य अधिकारी/जिला मलेरिया अधिकारी।

जागरूकता अभियान चला रहा स्वास्थ्य विभाग
हल्द्वानी। शहर में अब तक डेंगू के बागजाला, दमुवाढूूंगा, आरके टैंट हाउस इलाकों से छह मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिलेभर में मच्छर जनित रोगों के संक्रमण से बचने के लिए जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा सभी सीएचसी, पीएचसी में जांच किट और मच्छरदानियां बांटी गई हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार हर साल मच्छर जनित रोगों से सैकड़ों मौतें हो जाती हैं। जिनमें इसकी गंभीर स्थिति होने पर रक्तस्त्राव, रक्तचाप में अचानक कमीं और मृत्यु का जोखिम भी हो सकता है।

मलेरिया
यह परजीवी मच्छरों के काटने से फैलता है। आमतौर इसमें मरीज को तेज कंपकंपी और ठंड महसूस होती है। कई बार मलेरिया के कारण फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो सकते हैं जिससे सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। किडनी-लीवर को भी नुकसान पहुंच सकता है। उपचार के साथ ही खान-पान का ध्यान रखकर मलेरिया के रोगी को ठीक किया जाता है।




चिकनगुनिया :
चिकनगुनिया मच्छर जनित बीमारी है जिसका पहला लक्षण आमतौर पर बुखार है। जिसके बाद त्वचा पर चकत्ते होने लगते हैं। इसमें सिर दर्द, जी मिचलाने और उल्टी की समस्या रहती है। ऐसे में चिकित्सक अधिक तरल पदार्थ पीने की सलाह देते हैं।

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ये सावधानियां बरतें-
पूरी और लंबी बाजू के कपड़े पहनें।
रात में सोते समय खिड़की दरवाजे बंद रखें।
घरों में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
कूलर, फ्लावर पॉट और खाली बर्तन रखें साफ।
शाम के समय बच्चों को खुले में जाने से बचाएं।

बुखार बढ़ने पर डॉक्टरों से संपर्क करें।


कोट-
- जिले में अब तक छह मामले रिपोर्ट हो चुके हैं जिन्हें इलाज के बाद घर भेज दिया गया है। मच्छर जनित रोगों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर घरों में लोगों के बीच सतर्कता फैला रहा है। इसके अलावा मच्छर जनित रोगों से बचने के लिए पीएचसी और सीएचसी में मच्छरदानी भी बांटी गई हैं। - डॉ. भागीरथी जोशी, सीएमओ नैनीताल।
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