रामनगर ढेला में रेक्स्यू सेंटर के निरीक्षण को आए एनटीसीए के डीआईजी। सुरेंद्र मेहरा। अमर उजाला
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रामनगर। 1940 तक कॉर्बेट नेशनल पार्क में गैंडे थे, लेकिन उसके बाद ऐसा क्या हुआ कि यहां से गैंडे गायब हो गए। इस पर रिसर्च करना बेहद जरूरी है, यदि बिना रिसर्च के गैंडों को यहां लाया गया तो उनका यहां बचना मुश्किल होगा। एनटीसीए के डीआईजी सुरेंद्र मेहरा के अनुसार बिना रिसर्च के गैंडे कॉर्बेट में नहीं लाए जाएंगे।
ढेला में बन रहे रेस्क्यू सेंटर के निरीक्षण को पहुंचे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के डीआईजी मेहरा ने बताया कि हाल ही में स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में कॉर्बेट पार्क में दस गैंडों को लाने की मंजूरी मिली है। इन गैंडों को नेपाल और असोम से लाने पर विचार पर किया जा रहा है।
लेकिन इन गैंडों को लाने से पहले कॉर्बेट पार्क में उनके इकोलॉजिकल परिस्थिति को देखने की जरूरत है। यह भी रिसर्च का विषय है कि आखिर 1940 के बाद यहां पर गैंडे क्यों नहीं रह सके। इन सब बिंदुओं पर रिसर्च करने के बाद ही यहां पर गैंडों को लाया जाएगा। वहीं, उन्होंने यहां पर रेस्क्यू सेंटर की जरूरत को भी बताया। उनके अनुसार जख्मी होने वाले वन्यजीवों को बेहतर उपचार मिल सके, इसके लिए ढेला में रेस्क्यू सेंटर बनाया जा रहा है। कॉर्बेट के अधिकारियों के साथ डीआईजी ने रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण किया।