द्वितीय स्प्रिंग बर्ड फेस्टिवल के तहत पक्षी प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर भी निकलकर आ रही है। विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के लिए पवलगढ़ रेंज मुफीद साबित हो रहा है। यह बात यहां अब तक करीब 352 प्रजातियों के पक्षियों की पहचान से साबित होती है।
यहां पर सबसे तेज उड़ने वाली पैरीग्रिराइन फाल्कन चिड़िया भी देखी गई देखने को मिल रही है, जिसे भारत में इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने खतरे में बताया है। इसके अलावा ग्रेट स्लेटी वुड पैकर बर्ड की भी यहां के जंगलों में अच्छीखासी तादात है।
स्प्रिंग बर्ड फेस्टिवल में पहुंचे पक्षी विशेषज्ञों के समूहों ने बृहस्पतिवार को 60-65 प्रजातियों के पक्षियों का दीदार किया। सीतावनी-क्यारी की ट्रेल में तो एक ही जगह पर चार-चार प्रजाति के शिकारी पक्षियों के दीदार होने से पक्षी प्रेमी बेहद खुश हुए। पक्षी विशेषज्ञ सत्यपाल सिंह ने बताया कि यह लक्षण काफी अच्छे हैं। उन्होंने ग्रेट स्लेटी वुड पैकर बर्ड की तस्वीर भी अपने कैमरे में कैद की है। बताया कि उन्होंने पेरीग्रिराइन फाल्कन के अलावा खतरे में पड़ी कॉमन क्रैस्ट्रल, स्टैप ईगल और ब्लैक शोल्डर्ड प्रजाति की चिड़िया भी देखी, जो कि पक्षी प्रेमियों के लिए शुभ संकेत है।
वहीं पक्षी विशेषज्ञ संजय सौंधी कहते हैं कि पवलगढ़ कंजर्वेशन में 352 प्रजातियों के पक्षियों की पहचान से ये तो तय है कि यहां की आबोहवा परिंदों के लिए मुफीद है, लेकिन इसे बरकरार रखने के लिए काफी काम करना होगा। उनका कहना है इस क्षेत्र को पक्षियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए कार्बेट पार्क के इर्द-गिर्द बने बड़े-बड़े रिसोर्ट और कॉरिडोरो को बंद करना होगा।