विधानसभा चुनाव में मिली हार के कारण तलाश रही कांग्रेस के बड़े नेताओं को अपनों की ही तल्खी से दो चार होना पड़ रहा है। स्वराज आश्रम में बुधवार को समीक्षा को बुलाई गई बैठक में कुछ कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से ही इस्तीफा मांग लिया।
हालांकि कुमाऊं दौरे में किशोर से दूसरी बार इस्तीफा मांगा गया है। कुछ ने तो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी निशाने पर लिया। बाहर से आए लोगों को टिकट दिए जाने पर भी नाराजगी जमकर फूटी। कार्यकर्ताओं ने बड़े नेताओं पर ही गुटबंदी करने का आरोप तक लगाया।
बैठक में कार्यकर्ताओं ने कहा कि बूथ स्तर पर और गांव में रहने वाले कांग्रेसियों को जिम्मेदारी जी जाएगी तभी जीता जा सकता है। ऐसे लोगों को जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए जो अधिकांश समय जिले से बाहर ही रहते हैं।
कहा कि संगठन के समांतर संगठन चलने की परंपरा बंद होनी चाहिए। कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हमेशा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की और संगठन के सुझावों को भी नहीं माना। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी कार्यकर्ताओं को मिलने का समय नहीं दिया।
कार्यकर्ता ने यहां तक कह दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी की वजह से कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। आरोप लगाया गया कि मैं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत खेमे का हूं। रावत के जाने के बाद आरोप लगा था कि यशपाल आर्य का आदमी हूं।
अब यशपाल पार्टी में नहीं है और बड़े नेता बताएं कि मैं किसका आदमी हूं। कार्यकर्ता मिलकर काम करते हैं मगर बड़े नेता ही पार्टी में गुटबाजी कराते हैं। उपाध्याय और डॉ. हृदयेश ने कार्यकर्ताओं को मतभेद भुलाकर एकजुटता के साथ नगर निकाय के चुनाव और 2019 में होने वाले लोकसभा के चुनाव में जुटने का आह्वान किया।
इस दौरान दीपक बल्यूटिया, सतीश नैनवाल, राहुल छिम्वाल, प्रयाग दत्त भट्ट, खजान पांडे, नीलू नेगी, मंयक भट्ट, सरिता आर्या, सुमित्रा प्रसाद, जया बिष्ट, बीना जोशी, भागीरथी बिष्ट, भोला दत्त भट्ट, ललित जोशी, राजेंद्र नेगी, राजेंद्र बिष्ट, राजेंद्र सुयाल, हर्षवर्धन पांडे, महक खान, बलबीर रावत, सुहेल सिद्दीकी आदि थे।
देर से आने की आदत नहीं छूटी
स्वराज आश्रम में हार पर मंथन करने के लिए नैनीताल जिले और नैनीताल में रहने वाले प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों, ब्लाक अध्यक्षों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू होनी थी मगर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश दो घंटे बाद एक बजे स्वराज आश्रम पहुंचे।
आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने कहा कि हार के बाद सरकार से बाहर होने के बाद कार्यकर्ताओं से मिलने दो घंटे देर से आ रहे हैं कहीं सरकार बन गई होती तो समय से पांच-छह घंटे देर से आते।
दोनों बैठकों से नदारद रहे पूर्व सीएम
विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद छटपटा रही कांग्रेस जहां एक ओर मंथन कर हार के कारण खोजने में लगी है तो दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों बैठकों से नदारद रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव से पहले सरकार की उपलब्धियों, पलायन और पहाड़ी व्यंजनों की माला जप रहे थे और एकला चलो की राह पर सत्ता में वापसी का दंभ भर रहे थे। सत्ता से बाहर होने के बाद अब कांग्रेस मंथन में जुटी है तो जागेश्वर में भी पूर्व सीएम नहीं पहुंचे और बुधवार को स्वराज आश्रम में भी नहीं आए।