हल्द्वानी। पंचायत चुनावों में कांग्रेस का दबदबा अब जाता हुआ लग रहा है। जिले में निकाय चुनाव में कांग्रेस ने जो थोड़ी बढ़त ली थी, वह एक साल के अंदर ही पंचायत चुनाव में गंवाने के करीब पहुंच गई है। कभी एकछत्र राज करने वाली पार्टी का हाल ये है कि वह पंचायत चुनावों में जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद और भीमताल ब्लाक प्रमुख पद के लिए प्रत्याशी तक उतार नहीं सकी है, यहां पर भाजपा के प्रत्याशियों कानिर्विरोध निर्वाचन तय है। सफलता से गदगद भाजपा अन्य ब्लाक प्रमुख सीटों पर भी जीत को लेकर आश्वस्त है।
पिछले साल निकाय चुनाव हुए थे। इसमें कांग्रेस ने नैनीताल पालिका, रामनगर पालिका, लालकुआं नगर पंचायत और भीमताल नगर पंचायत सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि भाजपा हल्द्वानी नगर निगम, भवाली पालिका और कालाढूंगी नगर पंचायत सीट पर काबिज हो सकी थी। यानी चार निकायों पर कांग्रेस तो तीन पर भाजपा ने परचम फहराया था। एक साल के भीतर भाजपा ने एक बाद एक शिकस्त कांग्रेस को दी है। नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी ने कांग्रेस उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया था।
कांग्रेस का मनोबल इतना पस्त है कि पंचायत चुनाव में वह भाजपा को कड़ी टक्कर देना तो दूर प्रत्याशी उतारने तक की स्थिति में नहीं रही। जिला पंचायत सदस्य सीट (रामड़ी आन सिंह पनियाली) से लेकर जिला पंचायत उपाध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख भीमताल सीट पर कांग्रेस भाजपा को टक्कर देने के लिए प्रत्याशी नहीं ढूंढ सकी। भाजपा जिला महामंत्री चंदन बिष्ट के अनुसार भाजपा की लगातार जीत और बढ़ते जनाधार से कांग्रेस हतोत्साहित हो चुकी है। कांग्रेस ने जनता के बीच विश्वास खो दिया है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष सतीश नैनवाल के अनुसार पालिका और लोकसभा चुनावों से पंचायत चुनावों की तुलना नहीं की जा सकती है। रही बात पंचायत चुनाव की तो जहां पर सीधे जनता ने वोट दिया है, वहां पर कांग्रेस विचारधारा से प्रभावित लोग जीते हैं। कांग्रेस विचारधारा वाले ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य जीते हैं।
दिग्गजों का गढ़, ढीली हुई पकड़
हल्द्वानी। कांग्रेसी दिग्गजों के गढ़ में पार्टी की पकड़ ढीली पड़ गई। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी कांग्रेस ने प्रतिद्वंद्वी को थाली में परोसकर दी।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लगातार जिले में सक्रिय रहते हैं। हल्द्वानी से विधायक डॉ. इंदिरा हृदयेश नेता प्रतिपक्ष हैं। पूर्व राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी का कद भी पार्टी में बड़ा माना जाता है। लालकुआं से पूर्व विधायक हरीश चंद्र दुर्गापाल काबीना मंत्री रहे। पूर्व विधायक और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्या की गिनती भी बड़े नेताओं में होती है। बेतालघाट के ब्लाक प्रमुख सतीश नैनवाल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी हैं। उन्हें भी प्रत्याशी ढूंढे नहीं मिले। इसके बाद भी पंचायत चुनाव में कांग्रेस कुछ खास नहीं कर पाई। कांग्रेस के कमजोर चुनावी प्रबंधन का भाजपा ने जमकर फायदा उठाया। प्रदेश सचिव ललित जोशी ने बड़े नेताओं पर निशाना साधते हुए कह रहे हैं कि बड़े नेता खुद और परिवार केंद्रित सियासत कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं को अपना दरबारी समझने वाले नेता पार्टी को कमजोर कर रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी खड़ा न होना अच्छा संकेत नहीं है।
कोट
जिस प्रत्याशी ने चुनाव प्रचार के लिए बुलाया वहां गया। पंचायत चुनाव में किसी ने भूमिका निभाने के लिए नहीं कहा। विधानसभा चुनाव राज्य सरकार की नाकामी पर होगा। कांग्रेसजन एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे।
-हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री
इसका असर विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा। महिला सामान्य सीट होने के कारण कांग्रेस प्रत्याशी खड़ा नहीं कर सकी। कांग्रेस की संभावित प्रत्याशी संध्या डालाकोटी को कांग्र्रेस-भाजपा ने मिलकर चुनाव हराया।
-डॉ. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
नाम वापसी के बाद कांग्रेस अपने पत्ते खोलेगी। भाजपा के बागियों पर कांग्रेस की पूरी नजर है। विकास बनाम धन का चुनाव है। विकास को प्राथमिकता देने वाले कांग्रेस को वोट करेंगे।
-सतीश नैनवाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में कांग्रेस का जिला पंचायत अध्यक्ष होने के बाद भी विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था। विधानसभा चुनाव भाजपा सरकार की नाकामियों पर होगा।
-प्रकाश जोशी, पूर्व राष्ट्रीय सचिव