द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। महिला एकता परिषद भिकियासैंण की ओर से चौड़ाथल में आयोजित गोष्ठी में बंदरों और जंगली सुअरों की समस्या प्रमुखता से उठी। महिलाओं ने कहा कि जंगली जानवरों के आतंक के चलते पहाड़ की खेती किसानी बुरी तरह से प्रभावित हो गई है। महिलाओं ने पहाड़ से निरंतर बढ़ रहे पलायन पर भी पीड़ा जाहिर की।
महिला एकता परिषद अध्यक्ष दुर्गा बिष्ट की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में सभी महिलाओं ने विशेष रूप से बंदरों, जंगली सुअरों, आवारा जानवरों की समस्या उठाई।
कहा कि खेती किसानी बर्बादी हो गई है लोग निरंतर पलायन कर रहे हैं, लेकिन सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं रह गया है। किसी भी सरकार ने इसके लिए कोई ठोस नीति तक नहीं बनाई।
शिलंग की ग्राम प्रधान हेमा नेगी ने कहा कि सरकार लोगों को राशन तो दे रही है लेकिन सही तरीके से राशनकार्ड नहीं बने हैं। इस कारण कई पात्र लोग छूट चुके हैं।
बाजन की ग्राम प्रधान गायत्री देवी ने बंदरों, सूअरों आदि से खेती को हो रहे नुकसान व बढ़ते पलायन पर चिंता जताई। महिलाओं ने पलायन, रोजगार, खेती, पशुपालन स्वास्थ्य आदि समस्याओं पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
चलो गांव की ओर के संयोजक मोहन कांडपाल ने महिलाओं को मास्क, दवाइयां, सैनिटरी नैपकिन आदि बांटे। अध्यक्ष दुर्गा बिष्ट ने राशन कार्डों की पुन: सर्वे करने की मांग उठाई। महिला एकता परिषद सचिव मधुबाला कांडपाल ने संचालन किया।
गोष्ठी में सर्वसहमति से तय किया कि नवंबर में महिला एकता परिषद का सम्मेलन किया जाएगा। गोष्ठी में सनड़े की अध्यक्ष पुष्पा रावत, बाजन अध्यक्ष कांति देवी, जनरखाणी की अध्यक्ष जानकी देवी, मटेला की भगवती देवी, शिलंग की कमला देवी, चौड़ाखाल की नंदी देवी, बाटुला अध्यक्षा कमला देवी आदि ने अपने विचार रखे।