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...तो मजदूरों के परिजनों को नहीं मिलेगा मुआवजा 

Sun, 11 Dec 2016 11:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, भीमताल (नैनीताल)।
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भीमताल (नैनीताल)। आमतौर पर किसी बड़ा हादसे के बाद सरकार मारे गए लोगों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान करती है, लेकिन गागर में हुए हादसे में मारे गए आठों मजदूरों के परिजनों को मुआवजा मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि हादसे में मारे गए मजदूरों और ठेकेदार के बीच काम को लेकर न तो किसी तरह का कोई कांट्रेक्ट हुआ था और न ही मजदूरों का सत्यापन कराया गया था। हालांकि प्रशासन की ओर से ठेकेदार को निर्देश दिए गए हैं कि पूरे मामले की रिपोर्ट श्रम विभाग के अधिकारियों को उपलब्ध कराए। 
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जिले के एक प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक इस तरह के कार्यों को कराने से पहले ठेकेदार और मजदूरों के बीच आपसी कांट्रेक्ट और सत्यापन कराए जाने का प्रावधान है। कांट्रेक्ट और सत्यापन की सूचना श्रम विभाग के अधिकारियों को भेजी जाती है। लेकिन, अधिकांश मामलों में इस तरह का कोई कांट्रेक्ट नहीं कराया जाता है। कांट्रेक्ट और सत्यापन का लाभ यह होता है कि कार्य के दौरान कोई हादसा हो जाए तो सरकार की ओर से मुआवजा देने की गुंजाइश बनी रहती है। लेकिन, गागर में काल का ग्रास बने मजदूरों के साथ ऐसा कोई कांट्रेक्ट नहीं हुआ था।

ऐसे में इस प्रशासनिक अधिकारी का मानना है कि इस मामले में मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलना संभव नहीं है। रविवार दोपहर में मजदूरों के शवों को लेकर अपने पैतृक गांवों को रवाना होने वाले राजू, हाशिम, संजय, लाल सिंह और चंदन ने कहा कि उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि जिन साथियों के साथ वह यहां पैसा कमाने आए थे, उनके शवों को लेकर उन्हें जाना होगा। गागर से विदा होते वक्त मजदूरों की आंखें नम थीं। बताया जाता है कि कुछ मजदूरों ने ठेकेदार और मौके पर मौजूद अधिकारियों के समक्ष मुआवजे की बात उठाई थी, लेकिन उनकी बातों को किसी ने तवज्जो नहीं दिया। 
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भीमताल (नैनीताल)। भाजपा, कांग्रेस, बसपा और उक्रांद समेत विभिन्न राजनैतिक दलों से जुड़े नेता इन दिनों विधानसभा चुनाव में खुद की दावेदारी के लिए मतदाताओं के घरों तक पहुंच रहे हैं। यही नहीं विधानसभा क्षेत्र में होने वाले सुख-दुख में भी विभिन्न पार्टियों के संभावित दावेदार अपनी उपस्थिति दर्ज कराना नहीं भूल रहे हैं।

लेकिन, गागर में आठ मजदूरों की मौत होने के 24 घंटे बाद भी इक्का-दुक्का नेताओं को छोड़ कोई भी संभावित दावेदार मृतक मजदूरों के परिजनों से मिलने और उन्हें ढांढस बंधाने नहीं पहुंचा। लोगों का कहना है कि चूंकि उक्त मजदूर झारखंड और उत्तर प्रदेश के थे और यहां उनका और उनके परिवार का वोटर लिस्ट में नाम नहीं था। यही कारण है कि नेताओं ने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर मृतक मजदूरों के परिजनों को ढांढस बंधाना जरूरी नहीं समझा। लोगों का कहना है कि यदि वह यहां के वोटर होते तो ढांढस बंधाने वाले नेताओं की लाइन लग जाती। 
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