नैनीताल। कॉमन कार्प प्रजाति की मछलियों की बढ़ती तादाद नैनीझील की सेहत के लिए खतरा साबित हो रही है। इस प्रजाति की मछलियों ने झील के पानी में कार्बन, नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा भी बढ़ा दी है। कार्बनिक पदार्थ न केवल झील के लिए बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं।
पंतनगर विवि के मत्स्य विज्ञान विभाग की ओर से पिछले दिनों नैनीझील की मछलियों पर किए गए सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है। विवि के मत्स्य विशेषज्ञों का दावा है कि यदि समय रहते नैनीझील से कॉमन कार्प मछली नहीं निकाली गई तो भविष्य में इसके दुष्परिणाम देखने को मिलेंगे।
मत्स्य विज्ञान विभाग के सह प्राध्यापक प्रो. आशुतोष मिश्रा बताते हैं कि कॉमन कार्प मछली पानी के भीतर मिट्टी और दीवारों को खोदकर अपना भोजन निकालती है।
इससे झील से लगी दीवारों में भूक्षरण होता है और दीवारें कमजोर पड़ने लगती हैं। उन्होंने बताया कि नैनीझील में कई जगह ऐसी स्थिति देखी गई है। प्रो. मिश्रा का कहना है कि कॉमन कार्प मछली जब झील के तल में जमा मिट्टी और गाद को खोदती है तो तल में मौजूद कार्बनिक पदार्थों में उथल पुथल होती है और इससे पानी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ने लगती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में नैनीझील में किए गए सर्वे में झील में कार्बन, नाइट्रोजन और फास्फोरस मानक से अधिक मिला था। पानी में फास्फोरस की मात्रा .05 से कम होनी चाहिए जबकि नैनीझील के पानी में .1 से .2 तक फास्फोरस मिला है। इसी तरह नाइट्रोजन की मात्रा .2 से कम होनी चाहिए जबकि झील में .7 तक नाइट्रोजन पाया गया है।
मत्स्य विशेषज्ञ का कहना है कि पानी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा अधिक होने से पादप लवक भी मरने लगते हैं जिसका सीधा असर मछलियों के जीवन चक्र पर पड़ता है।
दूसरी प्रजाति की मछलियों के लिए भी खतरनाक है कॉमन कार्प
नैनीताल। नैनीझील में मौजूद कॉमन कार्प मछलियां झील में मौजूद अन्य प्रजाति की मछलियों के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो रही हैं। मत्स्य विज्ञान विभाग के सह प्राध्यापक प्रो. आशुतोष मिश्रा बताते हैं कि अन्य प्रजातियों की मछलियों की अपेक्षा कॉमन कार्प कहीं अधिक बार ब्रीडिंग करती है और तेजी से अपने कुनबे को बढ़ाती है।
यही नहीं यह मछली अन्य प्रजातियों की मछलियों के अंडों को भी चट कर जाती है जिससे दूसरी प्रजाति की मछलियों की संख्या झील में कम हो जाती है। कई बार कॉमन कार्प अपने ही अंडे खा लेती है। प्रो. मिश्रा का कहना है कि यदि कॉमन कार्प प्रजाति की मछलियों को नैनीझील से नहीं निकाला गया तो झील में मौजूद महाशीर, सिल्वर कार्प, बिगहेड, डेरो, साइगो समेत अन्य प्रजातियों की मछलियों के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा।
डल झील और लोक्टस लेक में भी दिखे कॉमन कार्प के दुष्परिणाम
नैनीताल। पंतनगर विवि के मत्स्य विशेषज्ञ प्रो. आशुतोष मिश्रा का कहना है कि कुछ साल पहले तक कश्मीर की डल झील में कॉमन कार्प की संख्या बढ़ गई थी। वहां कॉमन कार्प ने झील में पहले से मौजूद स्नो ट्राउड प्रजाति की मछली को खत्म कर दिया था। बताया कि मणिपुर स्थित लोक्टस लेक में कॉमन कार्प मछली ने ओ स्ट्रीयोग्रामा प्रजाति की मछली को खत्म कर दिया था।
नैनीझील में मौजूद कॉमन कार्प प्रजाति की मछली का झुंड।- फोटो : NAINITAL