प्रशासन के अफसरों पर कांग्रेस और भाजपा का किस कदर रंग चढ़ा है इसका अंदाजा शुक्रवार को देखने को मिला। शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे गांधीनगर में बसपा प्रत्याशी शकील अहमद केके की जनसभा की अनुमति के लिए पार्टी के महानगर अध्यक्ष ताहिर हुसैन शेख और हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष मनोज जाटव एक अफसर के पास पहुंचे।
अफसर के कक्ष में भीड़ खत्म होने पर बसपा पदाधिकारियों ने अफसर को जब अपना परिचय देते हुए जनसभा की अनुमति के बाबत अनुरोध किया तो अफसर ने पदाधिकारियों से तपाक से पूछ लिया कैसी बसपा? कहां की बसपा? यह सुनकर बसपा पदाधिकारी दंग रह गए। वह समझ नहीं पाएं कि यह मजाक है या फिर अफसर वास्तव में सीरियस है।
.. कुछ देर चुप्पी के बाद पदाधिकारी ने उलटे अफसर से ही पूछा आप बसपा को नहीं जानते क्या? पदाधिकारियों ने याद दिलाया कि बसपा भी राष्ट्रीय पार्टी है।
इसके बाद महानगर अध्यक्ष ताहिर ने अफसर को रात साढ़े आठ बजे से रात दस बजे तक चुनावी जनसभा करने की अनुमति के लिए अनुरोध पत्र दिया तो अफसर ने रात दस बजे तक की अनुमति देने से इंकार कर दिया, बोले जनसभा नौ बजे तक खत्म करनी होगी।
इस पर बहस हो गई। बाद में कुछ तुम आगे बढ़ो, कुछ हम पीछे चले के फार्मूले पर 9:30 की अनुमति कांटा तय हो पाया। जब बाद में अफसर ने चुनावी मीटिंग में बसपा नेताओं से मिले.. तो तपाक से सॉरी बोला। बसपा नेता फिर चक्कर में पड़े कि भाई यह सीरियस हैं या फिर मजाक के मूड में हैं।