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कालोनी जितनी ऊंची, टैक्स उतना ऊंचा

Thu, 21 May 2015 01:52 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला,हल्द्वानी
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नगर निगम भवन कर लेने के सिस्टम में बदलाव करने जा रहा है। पहले नगर निगम भवन कर एक तरह से बिल्डिंग का अंदाजा (अनुमानित किरायेदारी) लगाकर लिया जाता था, पर अब कालोनी का स्टेटस, सड़कों (सर्किल रेट की तर्ज) आदि के आधार पर टैक्स लेने की योजना बनाई है। इस संबंध में प्रस्ताव आगामी नगर निगम की मीटिंग में लाने की तैयारी है। ऐसे में टैक्स में 25 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
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नगर निगम सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मकान बने हैं, पर अब तक 16 हजार 500 मकानों से ही टैक्स लिया जाता है। यह टैक्स आज के दौर में बेहद कम है, हल्द्वानी जैसे आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इलाके से बमुश्किल 1 करोड़ 48 लाख का भवन कर ही मिल पाता है।

अब तक नगर निगम टैक्स लेने के पीछे अनुमानित किरायेदारी का फार्मूला लगाता था। इसमें कर विभाग का एक अधिकारी भवन का निरीक्षण करता था, फिर उसका अंदाजा लगाकर टैक्स वसूल करता था, लेकिन अब नगर निगम ने इसमें बदलाव करने के साथ ही भवन कर को ज्यादा तर्कसंगत बनाने की योजना बनाई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अब कर निर्धारण का तरीका बदल जाएगा।
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टैक्स अब क्षेत्रवार, वार्डवार, प्रति वर्ग फीट आदि को देखते हुए कालोनी के ‘स्टेटस’ के हिसाब से लिया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिस तरह सर्किल रेट के निर्धारण में सड़क, उसकी चौड़ाई आदि महत्वपूर्ण होती है, वैसे ही इसमें भी मानक होंगे।

नैनीताल रोड वाली कालोनी से ज्यादा कर
सबसे महंगी जमीन और पॉश कालोनियां नैनीताल रोड पर हैं। ऐसे में इस इलाके में आने वाली कालोनी वालों को ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है। बात जिन पर कम कर लिए जाने की है, इसमें गांधी नगर, अंबेडकर नगर, राजपुरा आदि क्षेत्र हो सकते हैं।

मकानों की संख्या बढ़ेगी
इसके अलावा निगम सर्वे कराएगा। इसमें भवनों की संख्या 20 हजार तक हो सकती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कर 25 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका प्रस्ताव नगर निगम की अगली मीटिंग में रखे जाने की संभावना है।
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