जिले के दुर्गम क्षेत्र ओखलकांडा इलाके के छात्र-छात्राओं के लिए खुशखबरी है। उन्हें उच्चशिक्षा प्राप्त करने के लिए अब घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा। बृहस्पतिवार को ओखलकांडा के पतलोट में उच्चशिक्षा विभाग की नया डिग्री कॉलेज खुल जाएगा।
यह राजकीय महाविद्यालय पतलोट के राजकीय इंटर कॉलेज के दो कमरों में शुरू होगा। प्रभारी प्राचार्य और प्राध्यापकों समेत स्टाफ की बुधवार को उच्चशिक्षा निदेशालय ने तैनाती भी कर दी है। फिलहाल इस डिग्री कॉलेज में बीए की ही पढ़ाई कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले दिनों ओखलकांडा ब्लॉक के पतलोट में डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। शासन से डिग्री कॉलेज की स्वीकृति भी हो गई थी, लेकिन भवन आदि की व्यवस्था न होने के कारण डिग्री कॉलेज सत्र शुरू होने के समय शुरू नहीं हो सका था।
नए महाविद्यालयों को संचालित करने में आ रही अड़चनों को दूर करने के मकसद से उच्चशिक्षा के अपर सचिव रंजीत सिन्हा ने मंगलवार को शासन में उच्चशिक्षा विभाग के निदेशक एवं चार जिलों के प्राचार्यों के साथ ही जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी की बैठक बुलाई थी।
बैठक से लौटकर मुख्य शिक्षा अधिकारी आरएल आर्या ने बताया कि पतलोट डिग्री कॉलेज को शुरू करने के लिए शिक्षा विभाग ने पतलोट जीआईसी की लाइब्रेरी और लैब के कमरों को उपलब्ध कराने की एनओसी दे दी है।
जीआईसी के इन दो कक्षों में उच्चशिक्षा विभाग अपना नया महाविद्यालय शुरू कर सकता है। उन्होंने बताया कि हालांकि मालधनचौड़ डिग्री कॉलेज का अभी जीओ नहीं आया है, लेकिन इसके लिए भी भवन की तलाश की जा रही है।
उधर, उच्चशिक्षा विभाग के प्रभारी निदेशक डॉ. बीसी मेलकानी ने बताया कि एक सितंबर से पतलोट डिग्री कॉलेज शुरू हो जाएगा। इसके लिए बतौर नोडल अधिकारी एवं प्रभारी प्राचार्य रुद्रपुर महाविद्यालय के कॉमर्स के डॉ. एमसी पांडेय को भेजा गया है।
उनके साथ ही अर्थशास्त्र और इतिहास विषय के दो प्राध्यापकों के अलावा एक कर्मचारी की तैनाती भी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि पतलोट डिग्री कॉलेज में कला वर्ग में एडमिशन दिए जाएंगे। इसके अलावा कुमाऊं विवि को पतलोट महाविद्यालय को संबद्धता देने के संबंध में भी लिखा गया है।
इन इंटर कॉलेजों से मिलेंगे छात्र-छात्राएं
ओखलकांडा क्षेत्र में राजकीय इंटर कॉलेज नाई, भीड़ापानी, ओखलकांडा, डालकन्या, पटरानी समेत आठ राजकीय इंटर कॉलेज चल रहे हैं।
इंटर करने के बाद बड़ी संख्या में छात्राएं आसपास डिग्री कॉलेज न होने के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती हैं, जबकि छात्रों को हल्द्वानी या नैनीताल जाकर महाविद्यालय में दाखिला लेकर उच्चशिक्षा लेनी पड़ती है।
इन जीआईसी से हर साल पास होने वाले तीन सौ से अधिक छात्र-छात्राओं को उच्चशिक्षा की पढ़ाई करने में आसानी होगी।