जलवायु परिवर्तन सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि फूलों के खिलने का समय, अवधि और पौधों के आपसी तालमेल को भी प्रभावित कर रहा है। इस बदलाव से पौधों, परागणकर्ताओं और बीज फैलाने वाले जीवों के बीच का रिश्ता बिगड़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन का असर केवल तापमान तक सीमित नहीं है बल्कि फूल खिलने का समय, उसकी अवधि और पौधों के बीच समन्वय में बदलाव देखा जा रहा है। इसे फेनोलॉजिकल परिवर्तन कहा जाता है। ऐसे बदलाव पौधों और उनके परागणकर्ताओं और बीज फैलाने वाले जीवों के संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे पौधों की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है।
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डीएसबी परिसर के फॉरेस्ट्री एंड एनवायरमेंटल साइंसेज के विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष तिवारी के साथ जितेंद्र भट्ट और अमित मित्तल के शोध कार्य में हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए नई चुनौती सामने आई है। डॉ. तिवारी ने बताया कि शोध में तापमान, वर्षा, मिट्टी की नमी, शाखाओं के जल विभव और फूल कलियों के विकास पर दो वर्षों तक अध्ययन किया गया। परिणामों से संकेत मिले हैं कि मिट्टी की नमी और वृक्ष का जल संतुलन फूलों के विकास और खिलने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बदलाव हिमालयी क्षेत्र के लिए संवेदनशील : जलवायु परिवर्तन आज दुनियाभर के पारिस्थितिकी वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। सौ वर्षों में पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 0.6 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। भविष्य में इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रीनहाउस गैसों के लगातार उत्सर्जन से तापमान वृद्धि, अनियमित वर्षा और लंबे सूखे जैसी स्थितियां अधिक गंभीर होंगी। भारतीय हिमालयी क्षेत्र इस बदलाव के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है।
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जल उपलब्धता और पौधों की प्रतिक्रिया
जल स्थलीय पौधों की वृद्धि और वितरण का एक प्रमुख कारक है। जब वर्षा कम होती है या मिट्टी में नमी घटती है तो पौधों की कोशिकाओं का विस्तार, नई शाखाओं का विकास और फूल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे शुष्क काल पौधों के लिए चुनौती बन जाते हैं।
बुरांश के फूलों में बदलाव पर अध्ययन
मध्य हिमालय के वनों में पाए जाने वाले बुरांश पर किए गए अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया कि वर्षा और जल उपलब्धता उसके फूल आने के समय को कैसे प्रभावित करती है। बुरांश 1500 से 2700 मीटर तक वृक्ष रेखा तक पाया जाने वाला सदाबहार वृक्ष है। हाल के वर्षों में इसके फूलने के समय में परिवर्तन दर्ज किया गया है। पहले इसका फूल मार्च में खिलता था लेकिन अब यह जनवरी में ही खिलने लगा है।