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जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहीं प्राकृतिक आपदाएं

Tue, 03 Nov 2015 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल।
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 कुमाऊं विवि के भूगोल विभाग के सहयोग से सोमवार से जलवायु परिवर्तन के हिमालय पर प्रभाव और अनुकूलन विषय पर दो दिनी अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार शुरू हुआ।
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सेमीनार के उद्घाटन सत्र में गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि लगातार बढ़ रहे तापमान से अधिकांश ग्लेशियर पिघल रहे हैं। दुनिया के पर्वतों में हिमालय सबसे युवा है। धरती की आयु जहां 4500 मिलियन वर्ष हैं, वहीं हिमालय की आयु केवल 30 मिलियन वर्ष है।

प्रो. सिंह ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में ट्री लाइन लगातार ऊपर बढ़ रही है। वर्ष 1951 से 2008 तक के तापमान संबंधी आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तिब्बत के पठारी क्षेत्र में 0.2 से 0.6 सेंटीग्रेड तापमान प्रति दशक बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन से हिमालयी क्षेत्र से मानसून के समय कम बारिश हो रही है, जबकि प्री मानसून से अधिक बारिश हो रही है। जाड़ों के समय पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है।
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ब्लैक कार्बन के बढ़ते प्रभाव, वनाग्नि की घटनाओं व पर्वतीय क्षेत्र के लोगों का ईधन व चारे के लिए जंगलों पर निर्भर रहने से जैव विविधता व ईको सिस्टम प्रभावित हो रहा है। प्रो.सिंह ने कहा कि दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हिमालय से निकलने वाली नदियों के किनारे बसा है इसलिए हिमालय के इको सिस्टम की सुरक्षा के लिए नीति नियोजन में प्राथमिकता देना बहुत जरूरी है।

कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने कहा कि हमारे देश मेें करीब 700 विवि हैं, लेकिन अधिकांश विवि स्थानीय मुद्दों तक ही सीमित रहते हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय के संरक्षण को लेकर आयोजित इस सेमीनार में विशेषज्ञों द्वारा दी गई संस्तुतियां नीति निर्धारकों के लिए मददगार होंगी।

नेशनल मिशन फार सस्टेनिंग द हिमालयन ईकोसिस्टम व स्विस एजेंसी फार डेवलेपमेंट आपरेशन दिल्ली की समन्वयक डा. चेतना जोशी ने इंडियन हिमालया कलाइमेट एडाप्टेशन प्रोग्राम के बारे में बताया। ये संस्थाएं केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय के अधीन संचालित हैं, इसमें शोध कार्यों के लिए स्विस सरकार भी सहयोग करती है।

सेमीनार के मुख्य संयोजक व डीएसबी परिसर भूगोल विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. प्रकाश चंद्र तिवारी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

जलवायु परिवर्तन से हिमालय में पड़ने वाले प्रभाव और उसके अनुकूलन विषय पर दो दिन तक भारत के अलावा आस्ट्रेलिया, नार्वे, नीदरलैंड, नेपाल आदि देशों के विषय विशेषज्ञों के शोध रिपोर्टों के संकलन के बाद उनकी संस्तुतियों को अगले माह पेरिस में होने वाले संयुक्त राष्ट्र संघ के सम्मेलन में पेश किया जाएगा।
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इस मौके पर डीएसबी परिसर के निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता, प्रो. आरसी जोशी, प्रो. आरके पांडे, प्रो. सीसी पंत, प्रो. बीआर कौशल, प्रो.ललित तिवारी, डा.पुश्किन फर्त्याल, प्रो.एसएस बर्गली, प्रो.रघुवीर चंद, प्रो.जीएल साह, प्रो.बीएल साह, प्रो.नीरजा टंडन, प्रो. नीता बोरा शर्मा, डा.अनीता पांडे, डा.मनीषा त्रिपाठी, डा.मोहन लाल, डा.भगवती जोशी,अशोक महर, डा.पराग मधुकर धकाते, डा.बीना पांडे, प्रो.राजीव उपाध्याय, प्रो.प्रदीप गोस्वामी, प्रो.जेएस रावत, प्रो.नीरज तिवारी, डा.मनीषा त्रिपाठी, डा. शशिबाला वर्मा आदि मौजूद थे।
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