प्रदेश सरकार की स्पष्ट फिल्म नीति नहीं होने के कारण स्थानीय फिल्में दम तोड़ रही हैं। स्थानीय कलाकारों को आगे बढ़ने और उनकी फिल्मों को प्रोत्साहित करने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
हाल में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म दंगल को प्रदेश में टैक्स फ्री कर दिया गया है, लेकिन हालिया रिलीज स्थानीय फिल्म ‘गोपी भिना’ को उत्तराखंड में कहीं हॉल तक नसीब नहीं हो रहा है। स्थानीय फिल्मों को सरकार द्वारा प्रोत्साहन नहीं दिए जाने से कलाकार भी हतोत्साहित हो रहे हैं।
स्थानीय कलाकारों में ‘कगार की आग’ समेत तमाम फिल्मों, रंगमंचों में अपनी प्रस्तुतियों का लोहा मनवा चुके कलाकार घनश्याम भट्ट (घनदा) उर्फ उत्तराखंड के नाना पाटेकर कहते हैं कि उत्तराखंड में फिल्म की कोई स्पष्ट नीति नहीं होने से हमारे कलाकार दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। दंगल फिल्म को टैक्स-फ्री कर दिया गया है।
वहीं ‘गोपी भिना’ फिल्म में अहम रोल निभा रहे हेमंत पांडे उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के उपाध्यक्ष भी हैं, लेकिन बावजूद इसके स्थानीय फिल्मों के बारे में सरकार द्वारा कोई कारगर नीति नहीं बनाना दुखद है। कलाकार और एक निजी स्कूल में टीचर ज्योति पांडे कहती हैं कि सरकार को सभी सिनेमाघरों में स्थानीय फिल्मों को अनिवार्य रूप से दिखाने के निर्देश जारी करने चाहिए।
कलाकार रोहित मेलकानी कहते हैं कि यह ठीक है कि टैक्स फ्री कर दंगल फिल्म अधिक से अधिक लोगों को दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय फिल्मों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
किसी भी फिल्म को टैक्स फ्री करने से पहले उसे बोर्ड को दिखाना होता है। उत्तराखंड की ‘गोपी भिना’ फिल्म के अलावा अन्य स्थानीय फिल्मों को भी टैक्स फ्री कराने का प्रयास होगा। शासन में वार्ता हो चुकी है कि स्थानीय फिल्मों को सभी सिनेमाघरों और मॉल में आवश्यक रूप से दिखाया जाए। इसका शासनादेश जल्द जारी होने की उम्मीद है।
- हेमंत पांडेय, उपाध्यक्ष उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद।