उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य योगेश रजवार ने बुधवार को गफूर बस्ती स्थित सुचेतना संस्था का औचक निरीक्षण किया। यह संस्था बच्चों के लिए काम करती है। निरीक्षण में संस्था का कोई पंजीकरण नहीं मिला और कर्मचारियों के पास वैध दस्तावेज भी नहीं थे। पूछताछ में पता चला कि संस्था मिशनरी से मिलने वाले फंड से संचालित हो रही है। आयोग के सदस्य ने इसे गंभीर मामला बताया और बाल कल्याण समिति एवं चाइल्ड हेल्प लाइन को संस्था की गतिविधियों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। रजवार ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल को भी संस्था और उसके प्रभारी की जांच करने के लिए कहा। टीम ने वहां मौजूद रजिस्टर और अन्य दस्तावेज कब्जे में लिए हैं। बाल संस्थाओं में व्यवस्थाओं और बच्चों की सुरक्षा को परखने के उद्देश्य से हुए निरीक्षण में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल से रेणु अधिकारी, गोविंद, उपनिरीक्षक ज्योति कोरंगा आदि शामिल थे। पहले सरकारी विद्यालयों में पंजीकृत थे बच्चे मौके पर पांच बालिकाएं और छह बालक मौजूद थे। यह संस्था किशोर न्याय अधिनियम के तहत भी पंजीकृत नहीं है। बच्चों के बैठने का स्थान बाल सुरक्षा मानकों के विपरीत पाया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि संस्था में पहुंचने वाले बच्चे पहले सरकारी विद्यालयों में पंजीकृत थे। मिशनरी से मिलती है आर्थिक सहायता रजवार ने बताया कि गफूर बस्ती में गैर सरकारी संस्थान सुचेतना अवैध रूप से चल रहा है। संस्था में कार्यरत मीना सिंह ने अधिकारियों को बताया कि एनजीओ का फादर पाइस संचालन करते हैं। संस्था को मिशनरी से आर्थिक सहायता मिलती है। रजवार ने कहा कि मिशनरी की ओर से फंड देकर जरूरतमंद बच्चों को गुपचुप रूप से शिक्षा उपलब्ध कराना कई सवाल खड़े करता है उन्होंने यह भी कहा कि इसके पीछे कहीं कोई षड्यंत्र तो नहीं चल रहा है, इसकी भी जांच कराई जा रही है। बिना पंजीकरण बाल संस्थाओं के संचालन को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं। बाल सुरक्षा को ताक पर रखने वाले ऐसे गैर-कानूनी संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई होगी। - योगेश रजवार, सदस्य उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग