ब्लड प्रेशर, शुगर जैसे रोगियों के लिए कारगर कासनी की गंध ने अमेरिका, नार्वे, बेल्जियम के लोगों को भी दीवाना बना दिया है। वह मुख्य वन संरक्षक के कार्यालय फोन कर इस पौध की बाबत दरियाफ्त कर रहे हैं। बरेली, बनारस समेत देश के दूसरे हिस्सों से तो लोग इसे लेने आ ही रहे हैं। आलम यह है कि 5 हजार पौधे जंगलात महकमा बांट चुका है। अब 12 हजार पौधे और तैयार कराए जा रहे हैं, ताकि बढ़ती डिमांड से निपटा जा सके।
लाइफ स्टाइल, खानपान में बदलाव के कारण शुगर, ब्लड प्रेशर जैसे कई रोगों के लोग शिकार हो रहे हैं। किडनी और लीवर के रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इन रोगों से निपटने के लिए आमतौर पर अंग्रेजी दवा खाना पड़ती है, पर अब लोगों का रुझान आयुर्वेद से जुड़ी पुरानी पद्धतियों की तरफ हो रहा है। वन विभाग के अनुसंधान शाखा ने जो कासनी के पौधे विकसित किए हैं, विभाग का दावा है कि लोगों को इनके इस्तेमाल से फायदा हुआ है, लिहाजा इनकी मांग बढ़ गई है। मुख्य वन संरक्षक एसके सिंह मांग को देखते हुए ही नए सिरे से पौधे तैयार किए जा रहे हैं।
अनुभव किए जा रहे रिकार्ड
अनुसंधान प्रभारी मदन बिष्ट कहते हैं कि जिन लोगों को बीमारी में कासनी के इस्तेमाल से लाभ हुआ है, उनके अनुभव को भी रिकार्ड किया जा रहा है। यह कई रोगों में कारगर है।
वरिष्ठ आयुर्वेद रोग विशेषज्ञ डा. बिनोद जोशी कहते हैं कि कासनी लीवर, बवासीर, खांसी में कारगर है। इसका इस्तेमाल दूसरे दवाओं के बनाने में भी होता है।