हल्द्वानी। जिसकी आशंका जताई जा रही थी वही हुआ। 50 लाख का भुगतान बकाया न देने पर दवा सप्लाई करने वाली कंपनी ने हाथ खड़े तो सुशीला तिवारी अस्पताल में थायरायड, ट्रापटी और सोडियम-पोटेशियम की जांच बंद हो गई हैं। मरीजों को जांच के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। महंगी लैब में जांच को जाना पड़ रहा है।
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत के बाद भी सुशीला तिवारी अस्पताल प्रशासन ने सबक नहीं लिया। बजट के संकट को लेकर व्यवस्थाएं लड़खड़ाने लगी हैं। दवा और केमिकल सप्लाई करने वाली कंपनियों ने पहले ही भुगतान न होने पर दवा एवं केमिकल देने से इंकार कर दिया था। आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने भी जल्द भुगतान करने को कहा था।
एसटीएच में ट्रापटी (हृदय संबंधी जांच), थायरायड और सोडियम-पोटेशियम की जांचें 10 दिनों से बंद हो गई हैं। इन जांचों में प्रयोग होने वाली किट नहीं है। सूत्रों की मानें तो किट न होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। किट सप्लाई करने वाली कंपनी लगभग 60 लाख रुपये का बकाया है।
एसटीएच प्रबंधन अभी बकाएदारी अदा नहीं कर पाया है। बकाया धनराशि न मिलने के कारण कंपनी ने किट देने से इन्कार कर दिया है। कंपनी ने खाता में धनराशि आने के बाद ही किट की सप्लाई करने की बात कही है। एमएस डॉ. एके पांडे ने बताया कि किट न होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है।
कोट
बजट आ गया है और कंपनी को जल्द भुगतान कर दिया जाएगा। कंपनी से कहा गया है कि किट की सप्लाई शुरू करे। तीन से चार दिन में किट आनी शुरू हो जाएगी।
डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य