होली पर गुझिया और रंग-पिचकारी भले ही महंगी हो, लेकिन शराब खूब सस्ती हो गई। अप्रैल में शराब की दुकानों के ठेके होने हैं। मार्च में स्टाक क्लियरेंस करने के लिए दुकानदारों ने शराब की सेल लगा दी है। शराब सस्ती होने से बाजार से महंगे ब्रांड गायब हो गए। कई दुकानें तो ड्राई हो चुकी हैं। देर रात तक दुकानों में खासी भीड़ रही। लोगों ने होली के बहाने आगे के लिए भी कोटा सुरक्षित कर लिया। आबकारी विभाग के मुताबिक बुधवार और गुरुवार को शराब की रिकार्ड बिक्री हुई है।
हल्द्वानी में अंग्रेजी और देसी शराब की 12-12 दुकानें हैं। हर साल अप्रैल में शराब की दुकानों का लाटरी से आवंटन होता है। दुकानदारों का मासिक कोटा निर्धारित होता है। आमतौर पर दुकानदारों का महीने का कोटा खत्म नहीं होने पर उसे अगले महीने के कोटे में बढ़ा देते हैं। लेकिन मार्च में दुकानदारों के लिए शराब का कोटा खत्म करने का आखिरी मौका है। कोटा खत्म नहीं हुआ तो अप्रैल से नए ठेके हो जाएंगे और मौजूदा दुकानदारों की शराब अवैध हो जाएगी।
दुकानदारों ने स्टाक क्लियरेंस के लिए सेल लगा दी है। दुकानदारों में प्रतिस्पर्द्धा चल रही है। जिस दुकानदार का जितना अधिक कोटा बचा है वह उतनी अधिक छूट दे रहा है। शराब सस्ती होने से लोग पेटियां लेकर सुरक्षित कर रहे हैं। महंगे ब्रांड का स्टाक खत्म हो गया है। पांच से आठ सौ रुपए प्रति बोतल मिलने वाली शराब के अधिकतर ब्रांड भी दुकानों से गायब हैं। चार सौ रुपए प्रति बोतल की शराब तीन सौ रुपए और 280 रुपए तक बिक रही है।
सरकार को शराब से सर्वाधिक राजस्व मिलता है। हल्द्वानी की बात करें तो यहां वित्तीय वर्ष में फरवरी तक 22,91,099.780 लीटर देसी और 21,28098 बोतल शराब गटकी गई है। इसी तरह 18,25,771 बोतल और 4,21,221 केन बीयर पी गई है। देसी और अंग्रेजी शराब का साल भर में अकेले हल्द्वानी में करीब 1 अरब 47 करोड़ 64 लाख 13 हजार 680 रुपए का कारोबार हुआ है।
- हरीश जोशी, आबकारी निरीक्षक हल्द्वानी