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चंदू की साइकिल के क्या कहने

Fri, 13 May 2016 11:10 PM IST
निशांत खनी/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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अपनी साइकिल के साथ चंदू - फोटो : अमर उजाला
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जुनून से बढ़कर कुछ नहीं होता। किसी भी अविष्कार के लिए तकनीकी से ज्यादा व्यावहारिक ज्ञान और लगन मायने रखती है। दमुवाढूंगा में साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाले चंदू मौर्या ने यह साबित कर दिखाया। चंदू मौर्य ने चार महीने की कड़ी मशक्कत के बाद हाई स्पीड गियर वाली साइकिल बनाई है। सबसे बड़ी बात साइकिल को तिरंगे का रंग दिया गया है।
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24 वर्षीय चंदू मौर्य गरीब परिवार से है। आर्थिक तंगी से वह अपनी पढ़ाई नहीं कर सका। परिवार का हाथ बंटाने के लिए चंदू ने दमुवाढूंगा स्थित टीन शेड के पास साइकिल सर्विस सेंटर खोला। पर साइकिलों का चलन कम होने से दुकान में दिन भर मक्खियां भगाता रहा। चंदू बताता है कि एक दिन यकायक दिमाग में हाई स्पीड गियर वाली साइकिल बनाने का ख्याल आया। खयाल आने भर से वह रोमांचित हो उठा। साइकिल बनाने के लिए पार्ट्स एकत्र करने में जुट गया।

चंदू के मुताबिक हाई स्पीड गियर की साइकिल उसने खुद डिजाइन की। साइकिल को अलग मॉडल देने का प्रयास किया। साइकिल बनाने में करीब चार महीने लग गए। कई बार आधी अधूरी साइकिल एसेंबल करने के बाद तोड़ दी। नए-नए तरीकों के साथ साइकिल की आधुनिकता भी बढ़ती गई। चार महीने में चंदू की साइकिल तैयार हो गई। खुद की मेहनत छोड़कर पार्ट्स में ही करीब 14 हजार का खर्चा आ गया। चंदू के मुताबिक साइकिल तैयार होने के बाद उसमें तिरंगे का कलर किया गया। छोटे टायर का चक्र भी बनाया। साइकिल तैयार होने के बाद उसी से गर्जिया मंदिर गया।
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चंदू की साइकिल में छह हाई स्पीड गियर हैं। डबल चैन कवर लगा है, जिससे पैरों की सुरक्षा होती है। साइकिल में डबल सीट लगी है। पीछे आराम से दूसरा व्यक्ति बैठ सकता है। साइकिल के मडगार्ड खुद तैयार किए हैं। साइकिल के पीछे सामान रखने के दो बाक्स लगाए हैं। साइकिल में फोकस लाइट और बैटरी हार्न लगाया है। चंदू की साइकिल सड़क पर उतरते ही लोग उसे बड़े गौर से देखते हैं। 
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