रामपुर तिराहे पर उत्तराखंड के आंदोलनकारियों पर हुए अत्याचार के विरोध में सुनवाई नहीं होने पर जब उत्तराखंडियों के स्वर बुलंद हुए तब हाईकोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए। तत्कालीन मुलायम सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच की सिफारिश तो कर दी लेकिन इस जांच को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। नतीजतन, सीबीआई की पहली जांच सत्य से परे आई, जिसका विरोध हुआ।
इस पर सीबीआई ने बिहार सीबाआई में तैनात निर्मल ढौंडियाल को जांच सौंपी। उन्होंने ही अपनी रिपोर्ट में महिलाओं पर हुए अत्याचार को उजागर किया था। देहरादून के बसंत विहार में रहने वाले निर्मल ढौंडियाल का पिछले दिनों ही निधन हो गया है।
गढ़वाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के पूर्व एचओडी और वरिष्ठ पत्रकार आशा राम डंगवाल ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि 1951 में नरेंद्र नगर टिहरी में जन्मे निर्मल ने आईपीएस के लिए चयनित होने के बाद 1988 से 1997 तक सीबीआई में सेवाएं दी थीं। 30 अप्रैल 2012 को वह एडीजीपी बिहार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
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राष्टपति पदक से सम्मानित निर्मल चंद्र ने उत्तराखंड आंदोलनकारियों पर हुए अत्याचार की जांच के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की धमकियों और प्रलोभनों की परवाह न करते हुए मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा कांड के सत्य को अपनी जांच में उजागर करने के साथ ही पुष्टि भी की थी कि महिला आंदोलनकारियों के साथ अभद्रता और दुराचार हुआ। इस रिपोर्ट के आधार पर ही मुख्य रूप से दोषियों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज किए गए जिसमें से एक पर फैसला 18 मार्च को आया है। अन्य मुकदमों पर अभी सुनवाई जारी है।