सरकारी विभाग में समन्वय और कामकाज कैसे होता है, इसे ऊंचापुल से आरटीओ आफिस के आगे तक नहर कवरिंग से समझा जा सकता है।
सिंचाई विभाग ने मोटी रकम खर्च कर नहर तो कवर कर दी, लेकिन इस कवरिंग पर नई सड़क और मौजूदा सड़क जो बदहाल स्थिति में है, उसे कौन बनायेगा? यह तय नहीं हो सका है। सिंचाई विभाग का कहना है नहर कवर करने का काम था, वह कर दिया गया है।
अब आगे लोनिवि की जिम्मेदारी है। लोनिवि का कहना है कि उसके पास तो सड़क का प्रस्ताव ही नहीं है। न ही नहर कवर करते समय कोई बात हुई।
सिंचाई विभाग ने ऊंचापुल से जयदेवपुर तक करीब डेढ़ किमी तक नहर कवरिंग की योजना पर काम शुरू किया। नाबार्ड पोषित योजना के तहत आरटीओ आफिस के आगे तक नहर को कवर भी कर दिया गया है।
अब लोग नहर कवर होने के बाद नहर कवरिंग एरिया पर नई सड़क और पुरानी सड़क को नये सिरे से बनने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि सड़क लावारिस हो गई है।
सड़क को लेकर सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के सुर अलग-अलग हैं।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता टीडी कांडपाल का कहना है कि नहर कवरिंग का काफी हद तक काम पूरा हो चुका है, अब आगे सड़क बनाने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है। लोनिवि अधिशासी अभियंता रणजीत सिंह रावत कहते हैं कि सड़क बनाने के लिये कोई भी प्रस्ताव, योजना नहीं है।
पिछली बार कॉलटैक्स से लेकर एसटीएच तक नहर कवर किया गया था। उसमें बिजली पोल शिफ्ट करने, पानी की लाइन से लेकर सड़क बनाने का आदि का प्रस्ताव में शामिल किया गया था। इसका बजट भी स्वीकृत हुआ था। इस मामले कोई भी जानकारी उनके पास नहीं है।
सड़क से ऊंचा डाला स्लैब, फिर दोहराई गलती
कॉलटैक्स से एसटीएच तक नहर को कवर किया गया था, उसमें ऊंचा-नीचा स्लैब डाला गया था। इस बार जो काम हुआ है, उसमें भी कई जगह गलती दोहराई गई है। नहर कवरिंग का स्लैब मौजूदा सड़क से काफी ऊंचा डाला गया है।
ऐसे में सड़क को बराबर करने में ही पसीने छूटने के साथ ही लागत बढ़ना तय है। जो हालात हैं, उसमें सड़क जल्द बनेगी उसके आसार ही कम हैं।