कहते हैं कि मुश्किलों से हारने वाले टूट कर बिखर जाते हैं लेकिन, जो लोग मुश्किलों से लड़कर आगे बढ़ते जाते हैं जिंदादिली उसी का नाम है। ऐसी ही जिंदादिल महिला हैं 42 वर्षीय तुलसी तिवारी। जो परिवार के भरण पोषण के लिए काठगोदाम चौराहे पर सब्जी की दुकान चलाने के साथ ही पिकप भी चलाती हैं।
आज तुलसी तिवारी को काठगोदाम क्षेत्र में हर कोई जानता है। तुलसी के साथ ही उसके पिकअप की भी यहां पहचान हैं। पिकअप के लिए महिला ड्राइवर, कुछ असहज सा महसूस होता है क्या। इस सवाल पर तुलसी की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग है।
तुलसी ने गर्व से कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। देश में कई बेटियां सेना तक में सेवाएं दे रही हैं। ऐसे में मैं तो सिर्फ पिकप ही चला रही हूं, किसी तरह की कठिनाई का सवाल ही नही होता। तुलसी परिवहन विभाग के अधिकारियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहती हैं, अधिकारियों ने उन्हें पूरी तरह सहयोग देते हैं
तुलसी बताती हैं कि बारह वर्ष पूर्व पति चंद्रशेखर तिवारी के आकस्मिक निधन के बाद चार बेटों और एक बेटी के लालन पालन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ पड़ी। इसको लेकर उन्होंने काठगोदाम चौराहे पर सब्जी की दुकान शुरू की।
तुलसी कहती हैं कि शुरूआत में नवीन मंडी से सब्जी लाने के लिए काठगोदाम आने तक कोई भी टेंपो वाला जल्दी से तैयार नही होता था। तब मैने सोचा क्यों न में भी गाड़ी ले लूं। पैसे भी जमा थे। उससे एक छोटा हाथी खरीद लिया।
ड्राईवर को देख-देखकर खुद भी गाड़ी चलाना सीख गई तुलसी तिवारी के पास आज एक छोटा हाथी और पिकप भी है। तुलसी बताती हैं कि वे बुकिंग मिलने पर पहाड़ी रास्तों पर भी पिकप ले जाती हैं।