हल्द्वानी, बीएसएनएल कार्यालय में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते कर्मचारी। अमर उजाल
हल्द्वानी/नैनीताल। भारत सरकार और बीएसएनएल प्रबंधन के एक नए पायलट प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड परिमंडल में 98 प्रतिशत अधिकारियों और कर्मचारियों को शहरी क्षेत्रों से हटाकर ब्लॉक और पंचायत स्तर पर तैनात करने की योजना से खलबली मची है।
ऑल यूनियंस एंड एसोसिएशंस ऑफ बीएसएनएल ने इस फैसले का विरोध किया है। यूनियन ने इसे बीएसएनएल को पूरी तरह बर्बाद करने की साजिश करार दिया। इसके विरोध में हल्द्वानी बीएसएनएल मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन चल रहा है। धरने पर मनोज सिंह, जनरल सेक्रेट्री और जिला सचिव राजेश रावत, शंकर गुंजियाल, सर्वेश चौहान, अनूप गोस्वामी, धीरेंद्र सिंह, देवेंद्र कुमार आदि रहे। उधर, नैनीताल स्थित कार्यालय में बीएसएनएल के कर्मचारियों ने मांगों को लेकर धरना दिया।
कर्मचारियों ने संगठनात्मक पुनर्गठन योजना वापस लेने, वेतन संशोधन लागू करने और लंबित भत्तों का निस्तारण करने की मांग उठाई। संगठन के अनुसार 30 जुलाई को भी यह विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारियों ने धरना देकर अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान पुनर्गठन नीति से कर्मचारियों के जबरन स्थानांतरण की आशंका है जिससे नेटवर्क संचालन, ग्राहक सेवाओं और व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बीएसएनएल हित में पुनर्गठन आदेश तत्काल वापस लेने की मांग की। इस दौरान एसडीओ विकास मेहरा, पीसी बिनवाल, भास्कर दास, दीपक भंडारी, पीडी जोशी, रोहन प्रसाद आदि मौजूद रहे। संवाद