अंग्रेजों के जमाने की नहर नहीं होती तो कालाढूंगी वासी आज पेयजल के लिए तरस गए होते। कालाढूंगी और आसपास क्षेत्र को पेयजल आपूर्ति करने वाले नलकूप की मोटर एक हफ्ते से फुंकी है।
अक्सर नलकूप की मोटर फुंकने पर लोग इसी नहर का पानी पीने के उपयोग में लाते हैं और तब अनायास हर एक के मुंह से यह शब्द निकला है कि अंग्रेजों ने यह नहर नहीं बनाई होती तो क्षेत्रवासियों के पेयजल की आज क्या व्यवस्था होती।
कालाढूंगी क्षेत्र में हफ्तेभर से नलकूप की मोटर के फुंकने के कारण पेयजल की किल्लत है। विभाग एक हफ्ते बाद भी ग्रामीणों के लिए पेयजल का कोई उचित प्रबंध नहीं कर पाया है। अब लोगों को अंग्रेजों द्वारा बनाई गई नहरों का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
ब्रिटिश काल में कमिश्नर रहे हेनरी रैमजे ने सन 1860 में बौर नदी के पानी को एकत्र कर आठ किमी नहर का निर्माण कर ग्रामीण इलाकों तक पानी पहुंचाया। कुछ वर्ष पूर्व कालाढूंगी क्षेत्र में नलकूप लग जाने से इन नहरों के प्रति लोगों का नजरिया भी बदल गया।
ये नहरें आज अतिक्रमण की चपेट में हैं। कुछ लोगों ने अपने घरों का गंदा पानी तक इन नहरों में छोड़ा है, जिस कारण पानी प्रदूषित हो चुका हैं। परंतु जब भी कालाढूंगी क्षेत्र में पेयजल की समस्या आती हैं तो यहां के निवासियों को नहरों का सहारा ही लेना पड़ता है। नलकूप फुंकने के बाद लोग यह कहते सुने जा सकते हैं कि इससे तो अंग्रेज ही अच्छे थे।