ज्योलीकोट/नैनीताल। कुमाऊं की लाइफ लाइन कहे जाने वाले ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर वीरभट्टी पुल की बदहाली ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बना डबल लेन पुल यातायात शुरू होने के कुछ ही वर्षों में गहरे गड्ढों से छलनी हो गया है। पुल की सतह कई जगह से उखड़ चुकी है और कुछ गड्ढों में डामर व कंक्रीट की परत टूटने के बाद सरिया तक बाहर निकल आई है।
बारिश और लगातार वाहनों की आवाजाही के बीच विभाग की ओर से कभी-कभार गड्ढों में मिट्टी भरकर की जा रही खानापूर्ति से पुल का मरम्मत कार्य ज्यादा देर टिक नहीं पा रहा। इससे वाहन चालकों, खासकर दोपहिया सवारों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की मौजूदा हालत सिर्फ सड़क की खराब गुणवत्ता का मामला नहीं, बल्कि पुल के रखरखाव और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक गड्ढों के कारण चोटिल हो रहे हैं। वहीं, बड़े और गहरे गड्ढे पुल के ढांचे के लिए भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
गड्ढों में मिट्टी का इलाज, बारिश में फिर खुली पोल
पुल पर बने गड्ढों को स्थायी रूप से दुरुस्त करने के बजाय विभाग की ओर से समय-समय पर उनमें मिट्टी भर दी जाती है। बारिश होते ही मिट्टी बहकर सड़क पर बिखर जाती है। इसके बाद गड्ढे पहले से ज्यादा खतरनाक रूप में सामने आ जाते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय अस्थायी उपायों से काम चला रहा है।
2021-22 में शुरू हुआ था नया पुल
ब्रिटिश इंजीनियरों ने 1906 वर्ष में उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर वीरभट्टी पुल तैयार किया था। करीब एक सदी तक यह पुल खड़ा रहा। सितंबर 2017 में गैस सिलेंडरों से लदे एक ट्रक में आग लगने के बाद हुए धमाके में पुल क्षतिग्रस्त हो गया और यातायात के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया। इसके बाद यहां नए डबल लेन पुल का निर्माण करीब चार करोड़ रुपये की लागत से 2021-22 वर्ष में कराया गया। निर्माण के समय पुल की सतह कंक्रीट की बनाई गई थी, लेकिन अगले वर्ष ही इसकी सतह उखड़ने लगी। इसके बाद विभाग ने पुल पर डामरीकरण कराया। अब हालात यह हैं कि पुल पर दर्जनभर से ज्यादा गहरे गड्ढे हो चुके हैं। कई स्थानों पर डामर और कंक्रीट की परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। एक-दो गड्ढों में तो पुल की सरिया तक दिखाई देने लगी है।
- वीरभट्टी पुल में बार-बार गड्ढों की दिक्कत आ रही है, बरसात को देखते हुए तात्कालिक उपचार कर इन्हें भरा जा रहा है। विभाग की ओर से इसके स्थाई उपचार की योजना तैयार की जा चुकी है। बरसात के बाद इसमें पहले वेयरिंग कोट किया जाएगा। इसके बाद बिटुमेन कर इसका स्थायी समाधान कर दिया जाएगा
- महेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता, एनएचएआई