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सिलेबस से बाहर के प्रश्न आए तो किया परीक्षा का बहिष्कार

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ल्द्वानी एमबी महाविद्यालय में बीएससी के छटे समेस्टर की परीक्षा में गलत पेपर आने प्रोफेसर शांति ? - फोटो : HALDWANI
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हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज में सोमवार को बीए छठे सेमेस्टर शिक्षाशास्त्र के प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा में सिलेबस से अलग प्रश्नपत्र आने पर परीक्षार्थियों ने हंगामा कर दिया। इस पर कुमाऊं विवि ने आनन फानन में शिक्षाशास्त्र की सोमवार और मंगलवार दोनों दिनों की परीक्षा निरस्त कर दी है। बाद में विवि प्रशासन को शिक्षाशास्त्र के प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा 27 एवं द्वितीय प्रश्नपत्र की परीक्षा 28 अक्तूबर को कराने की घोषणा करनी पड़ी।
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सोमवार को एमबीपीजी कॉलेज में तृतीय पाली में दोपहर दो बजे से बीए छठे सेमेस्टर की शिक्षाशास्त्र विषय के प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा थी। इसमें 476 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। प्रश्नपत्र सामने आया तो विद्यार्थी सिलेबस से अलग प्रश्नपत्र देखकर हैरान रह गए। उन्होंने कक्ष निरीक्षकों से इसकी शिकायत की। उसके बाद हंगामा शुरू हो गया।
इस पर परीक्षा प्रभारी डॉ. नवीन भगत ने विवि से बात करने का आश्वासन देकर किसी तरह शांत किया। बाद में शिक्षाशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. शांति नयाल ने प्रश्नपत्र देखते ही कहा कि विवि ने गलत प्रश्नपत्र बनाया है। परीक्षार्थी पेपर छोड़कर परीक्षा कक्षों से बाहर निकल आए। महिला कॉलेज में भी परीक्षार्थियों ने प्रश्नपत्र सिलेबस से अलग आने पर आपत्ति जताई। वहीं, विवि का परीक्षा विभाग पहले तो इस कोशिश में लगा रहा कि जो प्रश्न आते हों, बच्चे कर दें लेकिन विद्यार्थियों की ओर से शिक्षाशास्त्र की प्रो. डॉ. नयाल इस बात पर अड़ गईं कि जो प्रश्नपत्र है नहीं, बच्चे वह पेपर क्यों देंगे।
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बाद में कुमाऊं विवि को शिक्षाशास्त्र विषय के सोमवार और मंगलवार दोनों दिनों की परीक्षा को निरस्त करना पड़ा। यह परीक्षा कुमाऊं के सभी डिग्री कॉलेजों में निरस्त की गई, जहां-जहां सोमवार को पेपर था। परीक्षा प्रभारी डॉ. भगत ने बताया कि अब यह परीक्षा 27 अक्तूबर और 28 अक्तूबर को होगी, इसकी सूचना जारी हो गई हैं।
शिक्षाशास्त्र का प्रथम प्रश्नपत्र भारतीय शिक्षा का इतिहास और समस्या पर होना चाहिए था, लेकिन कुमाऊं विवि ने अनुसंधान और सांख्यिकी पर आधारित प्रश्नपत्र दे दिया। बच्चों का विरोध जायज था। प्रथम प्रश्नपत्र नए सिलेबस के आधार पर क्यों तैयार किया गया, यह समझ से परे है। -प्रो. डॉ. शांति नयाल, विभागाध्यक्ष शिक्षाशास्त्र।
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