इस पॉलिसी को लागू करने का मुख्य मकसद यात्रियों, विशेषकर महिला यात्रियों की सुरक्षा है। बता दें कि ऑनलाइन बुकिंग में कंपनियां बस का नंबर नहीं बताती हैं। वह सिर्फ यह बताती हैं कि आपकी सीट कंर्फम हो गई है। बस यहां से मिलेगी। जब बस में बैठते हैं तो ही पता चलता है कि बस का नंबर क्या है।
हल्द्वानी से प्राइवेट बस कंपनियों के जरिये दिल्ली, आगरा, जयपुर, कानपुर, लखनऊ आदि के लिए प्राइवेट बसें संचालित की जा रही हैं। एक दिन में करीब 20 बसें हल्द्वानी, रामनगर से संचालित होती हैं। पर्यटन सीजन में इनकी संख्या 35 तक पहुंच जाती है। परिवहन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी है, फिर भी कभी कार्रवाई नहीं की गई। आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी ने बताया कि आनलाइन टिकट बुक करने वाली कंपनियों को प्रदेश का लाइसेंस लेना अनिवार्य है। एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत किसी भी कंपनी को परिवहन विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई कंपनियों के वाहन शहर की सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।