राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान श्रीनगर गढ़वाल में बीते वर्षों में पासआउट बांड धारी चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य विभाग में संविदा के पदों पर ज्वाइन न करने के मामले को लेकर शासन गंभीर हो गया है।
ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन ने समिति का गठन कर दिया है। कमेटी 15 दिनों के भीतर कार्रवाई को चिकित्सा शिक्षा सचिव को रिपोर्ट भेजेगी।
चिकित्सा शिक्षा सचिव डी. सेंथिल पांडियन ने कहा है कि शासन की जानकारी में आया है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान श्रीनगर गढ़वाल में विगत वर्षों में पासआउट बांड धारी चिकित्सकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में विभिन्न चिकित्सा इकाइयों में की गई थी।
लेकिन बांड धारी चिकित्सकों ने शर्तों के आधार पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया और न ही ऐसे बांड धारी चिकित्सकों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। चिकित्सा शिक्षा सचिव ने ऐसे बांड धारी चिकित्सकों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई किए जाने के लिए समिति का गठन किया है।
समिति में चिकित्सा शिक्षा के अपर सचिव अध्यक्ष होंगे और चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तराखंड के महानिदेशक सदस्य, चिकित्सा शिक्षा के निदेशक सदस्य सचिव और संबंधित मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य सदस्य बनाए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि यह समिति वर्ष वार पासआउट बांड धारी चिकित्सकों की ऐसी सूची जिनके द्वारा कार्यभार ग्रहण न करते हुए बांड का अनुपालन नहीं किया है के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कर इसकी सूचना 15 दिन के भीतर शासन को उपलब्ध कराएगी।
इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा के निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने भी दोनों मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं कि चिकित्सा शिक्षा सचिव के आदेशों के अनुसार पांच जनवरी 2017 को प्राचार्य समस्त तैयारी के साथ चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में उपस्थित हों। इसमें उन सभी पास आउट एमबीबीएस के छात्रों का पूरा ब्यौरा मंगाया गया है, जो बांड धारी है और राज्य में नियुक्ति के उपरांत सेवाएं नहीं दे रहे हैं।