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सुशीला तिवारी अस्पताल में खून की जांच बंद

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प्रतीकात्मक फोटो।
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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में खून की जांच बंद हो गई है। मरीजों को ऑपरेशन से पहले होनी वाली जांच के लिए निजी पैथालोजी से महंगी दामों पर जांच करानी पड़ रही है।
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एसटीएच में प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों के ऑपरेशन होते हैं। ऑपरेशन से पहले मरीजों के खून की जांच कराई जाती है। जांच में यह भी देखा जाता है कि मरीज के खून निकलने का समय और खून बंद होने का समय (ब्लीडिंग और क्लाटिंग) क्या है। प्रोथ्रोबिन टाइम और एपीटीटी जांच होती है। जांच रिपोर्ट गड़बड़ आने पर ऑपरेशन टाला जाता है और इंजेक्शन एवं दवा के माध्यम से खून निकलने का समय और खून बंद होने के समय को निर्धारित मानकों के अनुरूप लाने का प्रयास किया जाता है।
एसटीएच में पिछले एक सप्ताह से किट खत्म हो गई है। एसटीएच में ऑपरेशन के लिए आए मरीजों की जांच बाहर से कराई जा रही है। बाहर जांच पांच सौ रुपये में होती है, जबकि एसटीएच में सवा सौ से डेढ़ सौ रुपये के बीच जांच होती है।
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अस्पताल में किट खत्म हो गई है। किट के लिए आर्डर भेजा है। जल्द ही किट आ जाएगी। - डॉ. अरुण जोशी, एमएस
डीएम सविन बंसल ने दो टूक कहा कि सुशीला तिवारी अस्पताल में नान प्रैक्टिस अलाउंस लेकर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डाक्टर अगर नहीं चेते तो उनका पंजीकरण रद्द करा दिया जाएगा।
डीएम ने शुक्रवार को कैंप कार्यालय में राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा और एसटीएच के एमएस डॉ. अरुण जोशी के साथ बात की। साफ कहा कि स्पर्श हास्पिटल सील होने के दौरान एसटीएच में रहते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे एक डॉक्टर का नाम जांच रिपोर्ट में आ चुका है। हालांकि अब डॉक्टर एसटीएच छोड़कर जा चुके हैं, जबकि परख इमेजिंग सेंटर में छापे के बाद डॉ. पंकज महेश का नाम भी जांच रिपोर्ट में आया है।
बंसल ने डॉ. भैसोड़ा से कहा कि एसटीएच में नौकरी करके अपना अस्पताल चलाने से लेकर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों के नाम उनके पास हैं। डाक्टरों को चेता दें कि नान प्रैक्टिस अलाउंस लेते हुए निजी प्रैक्टिस न करें। कहा कि छापे आगे भी पड़ते रहेंगे और कोई भी डाक्टर अगर प्राइवेट प्रैक्टिस करते पकड़ में आया तो उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल से डाक्टर का पंजीकरण रद्द करा देंगे।
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